भारत-चीन व्यापार और निवेश बढ़ाने को सहमत

ज्योति मुकुल और शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 27, 2018 09:46 PM IST

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के आवास पर मंगलवार को नाश्ते के दौरान हुई बैठक के साथ भारत-चीन व्यापार वार्ता संपन्न हो गई। दोनों देशों ने कई संयुक्त समझौतों पर सहमति जताई है। काफी विचार-विमर्श के बाद भारतीय पक्ष गैर-बासमती चावल, सरसों, सोया खली, अनार, केला और अन्य फल एवं सब्जियों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए चीन को राजी करने में सफल रहा है। चीन ने भारत से दवा उत्पादों के निर्यात के मुद्दे के समाधान को लेकर भी सहमति जताई है। भारतीय निर्यातकों से 240 से अधिक औषधीय आवेदन चीन के साथ लंबित पड़े हुए हैं।  इसके अलावा दोनों पक्ष फार्मास्युटिकल क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए भी तैयार हुए हैं।
 
वहीं भारत ने भी चीनी नाशपाती, मैरीगोल्ड बीज और सेब के लिए बाजार पहुंच में तेजी लाने के लिए सहमति जताई है। मई 2017 में सैनिटरी ऐंड फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) से जुड़ी चिंताओं के बाद इन उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे पहले तक भारत लगभग 7 करोड़ डॉलर के सेब और 3 करोड़ डॉलर के नाशपाती का आयातक था।  अमेरिका-चीन व्यापार युद्घ के साए के बीच हुईं इन वार्ताओं में चीन ने लंबे समय से मौजूद व्यापार असंतुलन से जुड़ी भारत की चिंताओं को भी गंभीरता से लिया है। चीन ने संयुक्त आर्थिक समूहों (जेईजी) और चीन तथा भरत के बीच 'आर्थिक एवं व्यापार सहयोग के लिए पांच वर्षीय विकास कार्यक्रम' के जरिये इन चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्घता जताई है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'दोनों देश अपने साझा हितों को बरकरार रखने के लिए डब्ल्यूटीओ, और अन्य बहुपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचों के बीच सहयोग मजबूत बनाने के लिए सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने नियम-आधारित बहुपक्षीय वैश्विक के लिए अपनी प्रतिबद्घता दोहराई है।' दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश पर भी जोर दिया है। प्रभु ने चीन से भारत में निर्माण क्षेत्र में निवेश करने को कहा है। 
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