राजकोषीय घाटा अनुमान का 120 प्रतिशत

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Mar 28, 2018 09:58 PM IST

केंद्र सरकार का अप्रैल-फरवरी के दौरान राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.15 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह पूरे वित्त वर्ष 2017-18 के लिए तय 5.95 लाख करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य  के अनुमान का 120.3 प्रतिशत है। आधिकारिक आंकड़ा बुधवार को जारी हुआ। इस बात के संकेत हैं कि मार्च का आंकड़ा जारी होने पर पुनरीक्षित राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा करना बहुत मुश्किल लक्ष्य होगा।  राजकोषीय घाटा बढऩे की मुख्य वजह गैर कर राजस्व अनुमान से कम रहना है। सरकार को इस साल अब तक पूरे साल के लक्ष्य की तुलना में 60 प्रतिशत राजस्व आया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 62.4 प्रतिशत राजस्व आ गया था। सरकारी कंपनियों और बैंकों से उम्मीद से कम लाभांश रहने के कारण 2017-18 का लाभांश लक्ष्य घटाकर 1.06 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया, जो पहले 1.46 लाख करोड़ रुपये था। 
 
अभी इस बात को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है कि भारतीय रिजर्व बैंक 130 अरब रुपये अतिरिक्त भुगतान करने से मना कर सकता है, जो केंद्र सरकार ने केंद्रीय बैंक से मांगे हैं। अप्रैल फरवरी 2016-17 में राजकोषीय घाटा पूरे साल के घाटे के बजटीय अनुमान का 113.4 प्रतिशत था।  इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के बीच में केंद्र के कर राजस्व और विनिवेश से मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई, जितना कि कुल व्यय निर्धारित किया गया। ऐसे में गैर कर राजस्व कम रहने पर वित्त वर्ष 2018 में राजकोषीय घाटा पुनरीक्षित लक्ष्य की तुलना मेंं 20 प्रतिशत ज्यादा हो सकता है।' नैयर ने कहा कि मार्च 2018 में भी गैर कर राजस्व कम रह सक ता है, जो राजकोषीय घाटे के पुनरीक्षित अनुमान के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगा। 
 
नैयर ने कहा, 'कुल मिलाकर कुल व्यय में सालाना आधार पर मार्च 2018 में 2 प्रतिशत की कमी किए जाने की जरूरत है, जिससे पुनरीक्षित अनुमान के स्तर पर घाटे को रोका जा सके।' अप्रैल फरवरी के दौरान कुल व्यय पुनरीक्षित अनुमान का 90 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 87 प्रतिशत था। पूंजीगत व्यय लक्ष्य का 109 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल लक्ष्य का 77 प्रतिशत था।  वित्त वर्ष 2017-18 के संशोधित अनुमान में सरकार ने विनिवेश लक्ष्य बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य रखा है जो बजट अनुमान में 72,500 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष में 11 महीनों के दौरान राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 5.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक हस्तांतरित किए गए। यह 2016-17 के मुकाबले 66,039 करोड़ रुपये अधिक है। इस अवधि में सरकार का कुल व्यय 19.99 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। यह 2017-18 के लिए संशोधित अनुमान का 90.14 प्रतिशत है।
 
कुल व्यय में से 17.02 लाख करोड़ रुपये राजस्व खाते तथा 2.97 लाख करोड़ रुपये पूंजी खाता मद में की गई। कुल राजस्व व्यय में 4.50 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान तथा 2.27 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी भुगतान में किए गए। एक फरवरी को वित्त वर्ष 2018-19 का बजट पेश करते हुए जेटली ने 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 3.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया। इसका कारण जीएसटी का क्रियान्वयन तथा स्पेक्ट्रम नीलामी टाला जाना था। वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
कीवर्ड fiscal deficit, GDP, budget,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक