कारोबार सुगम बनाने में पश्चिम बंगाल हो सकता है अव्वल

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 28, 2018 09:59 PM IST

कारोबार सुगमता को लेकर राज्यों की सालाना रैंकिंग के तीसरे संस्करण में बंगाल 15वें स्थान से पहले स्थान पर आ सकता है, जिसके साथ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश भी होंगे। विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक सर्वेक्षण कराया जाता है।  बुधवार तक जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक यह संकेत मिलते हैं, जो रैंकिंग कराने वाले औद्योगिक  नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के ऑनलाइन डैशबोर्ड से पता चलता है। पिछले साल डीआईपीपी ने बिजनेज रिफॉर्म ऐक् शन प्लान 2017 के तहत नियामकी प्रक्रिया, नीतियों, कार्यप्रणाली या कार्यवाही में 372 सुधारों की सूची को अंतिम रूप दिया था। इसे 12 प्रमुख सुधार क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक राज्य द्वारा सफलतापूर्वक सुधार करने को डैशबोर्ड पर अद्यतन किया गया है जिसमें सुधारों को सबसे ज्यादा लागू करने वाले राज्यों को उच्चतम रैंक में रखा गया है। 
 
पिछले साल पश्चिम बंगाल इस सूची में 16वें स्थान पर चला गया था, जो पहले संस्करण की रैंकिंग में 11वें स्थान पर था। पिछले साल आंध्र प्रदेश व तेलंगाना प्रमुख राज्य के रूप में उभरे थे, जहां कारोबार सुगम था जबकि गुजरात तीसरे स्थान पर था। इस साल 3 प्रमुख राज्यों के बाद झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक को 10 प्रमुख राज्योंं की सूची में जगह मिल रही है। उत्तराखंड और महाराष्ट्र प्रमुख 10 राज्यों की सूची से बाहर हो सकते हैं, जबकि कर्नाटक वापसी करने जा रहा है।
 
जब पहली बार रैंकिंग की गई थी तो सिर्फ 7 राज्यों ने सरकार द्वारा दिए गए सुझावों का 50 प्रतिशत लागू किया था, जबकि दूसरे संस्करण में 18 राज्यों ने इस स्तर से ज्यादा सुधार लागू किए। इस साल यह संख्या सिर्फ 21 राज्यों तक पहुंच चुकी। बहरहाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को 0 से 100 के पैमाने में से महज 34 अंक मिले हैं। यह महत्त्वपूर्ण है कि विश्व बैंक अपनी रैंकिंग में भारत का स्कोर तय करने के लिए सिर्फ दिल्ली और मुंबई से आंकड़े लेता है।  राज्यों की रैंकिंग मेंं ििदल्ली को परंपरागत रूप से कमजोर रहे राज्यों जम्मू कश्मीर, त्रिपुरा और नगालैंड की श्रेणी में जगह मिली है, जिन्होंने कम अंक पाया है।
 
सरकार देश भर में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना चाहती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय और मणिपुर जैसे राज्य एक भी सुधार लागू नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से उनके अंक शून्य के करीब हैं। रैंकिंग शुरुआत मेंं जनवरी 2017 में आने की उम्मीद थी, लेकिन इसमेंं देरी हो गई। डीआईपीपी के अधिकारियों ने कहा कि अब अगले 4-5 सप्ताह में सूची आ जाएगी। डीआईपीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'राज्यों द्वारा किए गए सुधार की वैधता सहित सभी प्रक्रिया केंद्र की ओर से पूरी कर ली गई है। इस साल हम पहली बार उद्योग जगत से फीडबैक ले रहे हैं, जिससे इस प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाया जा सके और उसके बाद अंतिम रैंकिंग की गणना की जा सके। यही वजह है कि इस बार ज्यादा समय लगा।' 
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