ई-वे बिल के लिए तैयारी पुख्ता

करण चौधरी और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Mar 30, 2018 09:33 PM IST

इलेक्ट्रॉनिक-वे (ई-वे) बिल व्यवस्था के हकीकत बनने में कम से कम एक पखवाड़ा और लग सकता है। हालांकि यह व्यवस्था 31 मार्च की मध्य रात्रि से ही प्रभावी हो जाएगी। ई-वे बिल 50,000 रुपये से अधिक रकम की वस्तु पर अंतरराज्यीय आवाजाही पर लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में अधिक संख्या में ई-वे बिल बनने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि कारोबारी इस नई व्यवस्था की जद में तत्काल नहीं आना चाहते हैं और कर बचाने के लिए जमकर माल का जखीरा जुटा रहे हैं।
 
उद्योग जगत के पंडितों के अनुसार लगभग पिछले दो महीनों के दौरान ट्रकों से सामान्य से ज्यादा ढुलाई हो रही है। इसकी वजह यह है कि कई कारोबारी माल का अधिक से अधिक भंडार जमा करने में जुटे हैं। वैसे पहली बार ई-वेल बिल व्यवस्था के प्रभाव में आने के  बाद पोर्टल के धराशायी होने के बाद सरकार ने कुछ सबक जरू र लिए हैं और वह इस बार पूरी तरह मुस्तैद है। हालांकि इसके बाद भी कर्नाटक में इसकी व्यवस्था की शुरुआत पर संशय बना हुआ है।  इस नई प्रणाली के बारे में लोगों को बताने के लिए पिछले कई हफ्तों से सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। फरवरी में शुरुआत के दिन ही ई-वे बिल पोर्टल चरमरा गया था और तब तक 480,000 बिल बन पाए थे। अधिकारियों ने कहा कि अब पोर्टल की क्षमता आंकने के लिए कई परीक्षण हो चुके हैं। 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और जीएसटी नेटवर्क भले ही पूरी तरह आश्वस्त लग रहे हैं, लेकिन ई-वे बिल व्यवस्था प्रभाव में आने के बाद ही हकीकत सामने आ पाएगी। एक विशेषज्ञ ने कहा, 'यह व्यवस्था एक बार शुरू होने के बाद ही पोर्टल की क्षमता और अन्य बातों का पता चल पाएगा।'  शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात से ई-वे बिल व्यवस्था शुरू होने से पहले शुक्रवार और शनिवार के बीच ट्रांसपोर्टर अपनी क्षमता से पांच से छह गुना अधिक माल का परिवहन कर रहे हैं। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) में सीनियर फेलो और संयोजक एस पी सिंह ने कहा, 'क्षमता से अधिक परिवहन की एक वजह यह है कि यह खातों के बंद होने का समय है और लोग कम से कम 31 मार्च की मध्य रात्रि तक ई-वे बिल से बचना चाहते हैं। वे अगले चार से छह महीने के लिए माल का जखीरा जुटा रहे हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली से चेन्नई के लिए चला माल पांच ये  छह दिनों में पहुंचता है, इसलिए जो खेप तब तक निकल जाएगी उसके लिए ई-वे बिल का अनुपालन करना अनिवार्य नहीं होगा।'
 
सिंह ने कहा कि कर से बचने के लिए यह तामझाम हो रहा है। उन्होंने कहा, 'अगले पखवाड़े में मात्रा 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है, क्योंकि मांग कम रहेगी और लोग नई व्यवस्था में आने में समय लगाएंगे।' कुछ ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि माल परिवहन पर खर्च भी बढ़ गया है, इसलिए भी कारोबारी ई-वे बिल से फिलहाल बचना चाह रहे हैं। इस बारे में एक ट्रांसपोर्टर ने कहा, 'ट्रांसपोर्टर ट्रकों का किराया तीन गुना तक ले रहे है। इसकी वजह यह है कि वे ऐसे माल का परिवहन कर रहे हैं, जो कर मुक्त हैं। ज्यादातर राज्यों में वाहनों की चेकिंग अब नहीं होगी और सीमाओं पर नाके भी हटा दिए गए हैं। इससे माल की मात्रा और इनका मूल्य दोनों बढ़ गए हैं।'
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