कई बजट प्रस्ताव लागू होंगे 1 अप्रैल से

भाषा | नई दिल्ली Mar 30, 2018 09:45 PM IST

शेयरों की बिक्री से एक लाख रुपये से अधिक की कमाई पर फिर से लागू दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर (एलटीसीजी) समेत बजट के कई प्रस्ताव एक  अप्रैल से शुरू नए वित्त वर्ष में लागू हो जाएंगे।  इसके अलावा250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों पर कंपनी कर कम कर 25 प्रतिशत करने तथा व्यक्तिगत आयकर के मामले में परिवहन भत्ता और चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिम्बर्समेंट) के एवज में 40,000 रुपये की मानक कटौती समेत अन्य कर प्रस्ताव भी अमल में आ जाएंगे। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर से मुक्त ब्याज आय की सीमा पांच गुना बढ़ाकर50, 000 रुपए सालानाकर दी गई है। इसी तरह आयकर कानून की धारा80 डी के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर किए गए भुगतान तथा चिकित्सा व्ययपर कर कटौती की सीमा भी 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। 
 
यह सब नए वित्त वर्ष में पहली अपै्रल से ही लागू हो जाएंगे। वरिष्ठ नागरिक तथा अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए गंभीर बीमारी के मामले में कर छूट एक अप्रैल से एक लाख रुपये की गई है जबकि अब तक यह क्रमश: 60,000 रुपये और 80,000 रुपये थी। राजग सरकार के अंतिम पूर्ण बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अति धनाढ्यों पर 10 से15 प्रतिशत तक अधिभार को बरकरार रखा। साथ ही कर योग्य आय पर लगने वाले स्वास्थ्य तथा शिक्षा उपकर 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया है। यह प्रस्ताव भी रविवार से प्रभाव में आ जाएगा। वित्त वर्ष2018-19 के बजट में14 साल के अंतराल के बाद शेयरों की बिक्री से एक लाख रुपये से अधिक के पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत कर (एलटीसीजी) लगाने का प्रस्ताव किया गया।
 
फिलहाल एक साल के भीतर शेयर बिक्री से होने वाले पूंजी लाभ पर 15 प्रतिशत कर लगता है। हालांकि खरीद के एक साल बाद बेचे जाने से होने वाले पूंजी लाभ पर कोई कर नहीं देना होता है। सरकार ने हालांकि निवेशकों को इस मोर्चे पर कुछ राहत दी है। 31 जनवरी के बाद सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की बिक्री पर कर देनदारी की गणना करते समय मुद्रास्फीति के समायोजन का लाभ दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2004 में सरकार ने शेयरों पर एलटीसीजी हटा दिया था और उसकी जगह प्रतिभूति सौदा कर (एसटीटी) लगाया था। यह अभी जारी है।
 
आयकर तथा स्लैब को यथावत रखते हुए बजट में वेतनभोगियों तथा पेंशनभोगियों के लिए40,000 रुपए की मानक कटौती दी गई है। यह कटौती परिवहन और चिकित्सा व्यय के संदर्भ में मौजूदा छूट के बदले दी गई है। इस मानक कटौती की व्यवस्था को2006-07 से समाप्त कर दिया गया था। फिलहाल 19,200 रुपये परिवहन भत्ता तथा 15,000 रुपये तक के चिकित्सा व्यय पर कोई कर नहीं लगता। इसे अब 40,000 रुपये की नई मानक कटौती में ही समाहित कर दिया गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर में वृद्धि को देखते हुए मानक कटौती से कर बचत काफी कम होने का अनुमान है।
 
कंपनी कर के संदर्भ में बजट में250 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिए कर की दर कम कर 25 प्रतिशत किया गया है। इस बदलाव से पूरे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को लाभ होगा। वर्ष 2015 में जेटली ने 4 साल में कंपनी कर को मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का वादा किया था। अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए वित्त वर्ष 2018-19 का बजट राजग सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। अगले साल लेखानुदान पेश किया जाएगा। चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी। 
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