प्रशासनिक कायापलट के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता का मसौदा

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Apr 06, 2018 09:52 PM IST

मसौदा प्रत्यक्ष कर संहिता तैयार करने के लिए बनी सरकारी समिति जल्द ही सरकार को मसौदा पेश कर सकती है। केंद्र सरकार संहिता की जांच करेगी और कानून बनाने के पहले उसे लोगों से राय जानने के लिए सार्वजनिक किया जाएगा।  बिजनेस स्टैंडर्ड को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मसौदा प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) में कर ढांचे व दरों में बदलाव का प्रस्ताव होगा। इसमें कर प्रशासन को लेकर ज्यादातर बदलाव की पेशकश होगी।  एक अधिकारी ने कहा, 'डीटीसी के दो हिस्से होंगे। डीटीसी में करों में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत होगी, लेकिन कर प्रशासन के ढांचे में भी बदलाव की पेशकश की गई है, जो अधिसूचना और परिपत्र जैसे कार्यकारी फैसले से हो सकता है।' 
 
अधिकारी ने कहा, 'उम्मीद की जा रही है कि समिति मसौदा संहिता केंद्र को मई महीने मेंं सौंपेगी। उसकी जांच होगी और उसके बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा।' मसौदा कानून पर हिस्सेदारों से राय व फीडबैक लेने बाद ही उसे संसद के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।  नवंबर में केंद्र सरकार ने 6 सदस्यों वाले कार्यबल का गठन किया था, जिसे आयकर अधिनियम की समीक्षा करनी है और देश की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नए प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करना है।  इस कार्यबल की अध्यक्षता केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सदस्य अरविंद मोदी कर रहे हैं। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट और भारतीय स्टेट बैंक बोर्ड में निदेशक गिरीश आहूजा, ईवाई के राजीव मेमानी, कर अधिवक्ता मुकेश पटेल, इक्रियर की मानसी केडिया और भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी जीसी श्रीवास्तव शामिल हैं। 
 
प्रत्यक्ष कर संहिता का प्रस्ताव मौजूदा आयकर (आईटी) कानून की जगह लाने के लिए किया गया है। आईटी कानून सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार ने पेश किया था। 2009 मेंं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकारक ने मसौदा डीटीसी पेश किया था जिससे व्यक्तिगत करदाताओं के साथ कॉर्पोरेट्स के लिए कर कानून आसान हो सकें।  डीटीसी विधेयक 2010 संसद मेंं 2010 में पेश किया गया, जो 15वीं लोकसभा भंग होने के साथ खत्म हो गया। उस विधेयक में सालाना आईटी छूट सीमा 2,00,000 करने और 2,00,000 से 5,00,000 रुपये तक आमदनी पर 10 प्रतिशत, 5 लाख से 10 लाख आमदनी पर 20 प्रतिशत और उससे ऊपर आमदनी पर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव था। घरेलू कंपनियों के लिए कारोबारी आय पर 30 प्रतिशत कर दरों का सुझाव दिया गया था। 
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