सरकारी कंपनी बन सकता है जीएसटीएन

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Apr 10, 2018 09:51 PM IST

संभावना तलाश रही सरकार

वित्त मंत्री ने जीएसटीएन को सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी वाली या 100 प्रतिशत सरकारी कंपनी बनाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा
माना जा रहा है कि डेटा चोरी की घटनाओं के बाद उठाए जा रहे कदम
जीएसटीएन के पास देश भर की कंपनियों के होते हैं अहम आंकड़े
राज्यसभा की समिति ने बताया था जीएसटीएन को रणनीतिक महत्त्व का

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के 10वें महीने में केंद्र सरकार जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को एक सरकारी कंपनी में बदलने पर विचार कर रही है। जीएसटीएन इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था मे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ढांचे को देखता है और कंपनियों के संवेदनशील आंकड़ों की रक्षा की जिम्मेदारी इस सरकारी कंपनी पर होगी।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त सचिव हसमुख अढ़यिा से जीएसटीएन को सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी वाली कंपनी या 100 प्रतिशत सरकारी कंपनी बनाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। इस कदम पर ऐसे समय में विचार किया जा रहा है जब विभिन्न आंकड़ोंं के चोरी होने की खबरें आ रही हैं, जिनमें से फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका पर लगे आरोप अहम हैं। 

इसकी जांच के बाद प्रस्ताव को जीएसटी परिषद के पास भेजा जा सकता है।  इस समय केंद्र व सभी राज्य सरकारों की जीएसटीएन में प्रत्येक की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत है। शेष मालिकाने का बंटवारा बैंकों व वित्तीय संस्थानों- एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एनएसई स्ट्रैटजिक इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड में किया गया है। इसके पहले संविधान संशोधन विधेयक 2014 में राज्यसभा में जांच के लिए राज्यसभा की प्रवर समिति का गठन किया गया था।

समिति ने सिफारिश की थी कि सरकार गैर सरकारी वित्तीय संस्थानोंं की हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों या सरकारी वित्तीय संस्थानों तक कर सकती है। उस समय समिति ने अनुभव किया था कि जीएसटीएन, जीएसटी लागू करने मेंं अहम भूमिका निभाएगा और जीएसटी लागू करने के लिए यह आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएगा। ऐसा पाया गया कि जीएसटीएन में गैर सरकारी हिस्सेदारी में निजी बैंकों का दबदबा है।

समिति ने कहा था कि दो वजहोंं से यह उचित नहीं है। पहला, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की देश में कुल कर्ज देने में हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा है। दूसरे जीएसटीएन का काम देश के रणनीतिक महत्त्व का है और फर्म पर तमाम कारोबारी इकाइयों के संवेदनशील आंकड़ोंं की जिम्मेदारी है। 

सरकार ने इन सुझावोंं को स्वीकार नहीं किया और वह सरकार की ज्यादा हिस्सेदारी वाली या पूरी तरह से सरकारी कंपनी बनाने पर विचार कर रही है। जेटली ने उस समय संसद मेंं जीएसटीएन की प्रकृति का बचाव किया था। सरकार अब कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है, जबकि पोर्टल पूरी तरह से परिचालन में आ चुका है।  डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि जीएसटीएन की शेयरधारिता के ढांचे में प्रस्तावित बदलाव संभवत: हाल में अनधिकृत तरीके से आंकड़ों के इस्तेमाल को देखते हुए आया है।

पांच राज्यों में राज्यीय ई-वे बिल व्यवस्था 15 अप्रैल से 

राज्यों के भीतर माल के आवागमन के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था 15 अप्रैल से पांच राज्यों में शुरू हो जाएगी। इनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश और केरल जैसे राज्य शामिल हैं। सरकार ने एक राज्य से दूसरे राज्य में 50,000 रुपये से ज्यादा के माल के आवागमन के लिए एक अप्रैल से इलेक्ट्रॉनिक -वे या ई-वे बिल प्रणाली को लागू किया था।  वित्त मंत्रालय ने कहा कि राज्यों के भीतर माल के आवागमन के लिए ई-वे बिल व्यवस्था को 15 अप्रैल से शुरू किया जाएगा। ये 5 राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, केरल और उत्तर प्रदेश हैं। मंत्रालय ने कहा, 'इन राज्योंं में ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने के साथ यह उम्मीद की जा रही है कि कारोबार एवं उद्योग मेंं आने वाले दिनोंं में वस्तुओं का आवागमन देशव्यापी एकल ईवे बिल व्यवस्था की राह खुलेगी।' इन राज्यों के ट्रेड, इंडस्ट्री व ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकरण/नामांकन करा सकते हैं।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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