फरवरी में आईआईपी हो सकता है सुस्त

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Apr 10, 2018 09:52 PM IST

जनवरी तक लगातार तीन महीने औद्योगिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ज्यादा रहने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी में यह सुस्त रह सकता है। जनवरी महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 7.5 प्रतिशत बढ़ा, जो दिसंबर में हुई 7.1 प्रतिशत वृद्धि से ज्यादा है। इसकी वजह से अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया कि औद्योगिक रफ्तार बहाल हो रही है और नोटबंदी व वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के झटकों के बाद इसे आधार मिल गया है। लेकिन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक व्यापक आधार पर बढ़ोतरी की कमी और गैर तेल, गैर स्वर्ण आयात सुस्त रहने से वृद्धि पर लगाम लग सकती है। 
 
मदन सबनवीस ने कहा, 'फरवरी में हमें आईआईपी वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसे औद्योगिक बहाली के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन पिछले साल फरवरी में वृद्धि दर -1.9 प्रतिशत रहने और मार्च में 3.8 प्रतिशत रहने से इसका आधार प्रभाव कम है।' अगर उप क्षेत्रों पर नजदीक से नजर डालें तो इससे आईआईपी वृद्धि सुस्त रहने का अनुमान है। इसके अलावा आईआईपी के भीतर पूंजीगत वस्तुओं का क्षेत्र, जिससे निवेश का पता चलता है, जनवरी में 14.6 प्रतिशत की बेहतर दर से बढ़ा था, लेकिन दिसंबर के 16.4 प्रतिशत की तुलना में कम था। सबनवीस ने कहा, 'पूंजीगत वस्तुओं का क्षेत्र वाहन क्षेत्र से संचालित था और आंशिक रूप से गैर इलेक्ट्रिक मशीनरी का भी असर रहा। इलेक्ट्रिकल मशीनरी की वृद्धि दर  अभी भी 14 प्रतिशत है।' 
 
इक्रा में प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'कोल इंडिया लिमिटेड के उत्पादन, बिजली उत्पादन और वाहन उत्पादन की स्थिति से पता चलता है कि आईआईपी वृद्धि दर फरवरी 2018 में अनुक्रमिक बदलाव होगा, भले ही आधार का असर पक्ष में है।' अर्थशास्त्रियोंं का तर्क है कि अन्य वृहद आंकड़़े भी सुस्त आर्थिक वृद्धि दर्शा रहे हैं। गैर तेल और गैर स्वर्ण (एनओएनजी) घरेलू औद्योगिक मांग में अहम हैं, जिसमें वृद्धि दर जनवरी के 24.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बाद फरवरी में गिरकर 7.28 प्रतिशत रह गई है। नैयर के मुताबिक आधार का असर कम रहने के कारण आगे यह और सुस्त रह सकता है। इस श्रेणी में आयात दिसंबर 17 के 28.17 अरब डॉलर की तुलना में फरवरी 18 मेंं यह 24.72 डॉलर रह गया है। 
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