पीएफ ब्याज पर वित्त व श्रम मंत्रालय में ठनी

सोमेश झा | नई दिल्ली Apr 10, 2018 10:13 PM IST

उठाए सवाल

वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 2017-18 के लिए 8.55 फीसदी ब्याज दर घोषित करने के हालिया निर्णय पर कुछ सवाल उठाए हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को 15 मार्च को लिखे पत्र में वित्त मंत्रालय ने पूछा है कि ईपीएफओ ने 8.55 फीसदी ब्याज दर की घोषणा करते समय अधिशेष का स्तर अधिक क्यों नहीं रखा। ईपीएफओ ने इस तर्क का विरोध किया है।  यह लगातार तीसरा साल है जब वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय को अंशधारकों के लिए ब्याज दर पर निर्णय करने के दौरान ज्यादा अधिशेष सृजित करने को कहा है। वित्त मंत्रालय ने पिछले दो वर्षों में ईपीएफओ के ब्याज दर प्रस्ताव को खारिज करते हुए भी यही तर्क दिया था। लेकिन अंतत: ईपीएफओ द्वारा प्रस्तावित ब्याज दर के आधार पर भी अंशधारकों को भुगतान किया गया।

ईपीएफओ के केंद्रीय न्यास बोर्ड ने श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में 21 फरवरी को हुई बैठक में 2017-18 के लिए 8.55 फीसदी ब्याज दर की घोषणा की थी, जो पांच साल में सबसे कम है। इससेे ईपीएफओ के पास 5.86 अरब रुपये का अधिशेष रह जाएगा। ब्याज दर पर केंद्रीय न्यास बोर्ड के निर्णय को वित्त मंत्रालय से मंजूरी की जरूरत होती है, इसके बाद उसे सदस्यों के पीएफ खाते में डाला जाता है।

श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'वित्त मंत्रालय ने अब तक ब्याज दर को मंजूरी नहीं दी है, वहीं उसने ईपीएफओ के अधिशेष कोष में कमी आने पर सवाल खड़े किए हैं।' अपने जवाब में ईपीएफओ ने वित्त मंत्रालय को कहा कि ब्याज दर पर निर्णय करते समय पिछले साल के अधिशेष को शामिल करने की परिपाटी रही है। अधिकारी ने कहा, 'ईपीएफओ को कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 के मुताबिक अधिशेष बरकरार रखने की जरूरत नहीं होती है। हम ब्याज दर की गणना के समय हमेशा से ही पिछले साल के अधिशेष का उपयोग करते रहे हैं।'

वित्त मंत्रालय ने आरक्षित कोष बनाने की जरूरत पर भी बल दिया ताकि ईपीएफओ को निवेश पर होने वाले नुकसान की स्थिति सरकार पर किसी तरह का बोझ नहीं पड़े। वित्त मंत्रालय ने जहाजरानी मंत्रालय के तहत आने वाले सीमन्स के भविष्य निधि संगठन का उदाहरण दिया, जिसे 2006-07 में करीब 90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और उसकी भरपाई सरकारी खजाने से की गई थी।

ईपीएफओ के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'ईपीएफओ के गठन के बाद से कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि नुकसान की भरपाई करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव सौंपा गया हो। केंद्र सरकार से संंपर्क करने का सवाल ही नहीं उठता है क्योंकि ईपीएफ ऐंड एमपी अधिनियम के तहत कोष के प्रबंधन की जिम्मेदारी केंद्रीय बोर्ड के न्यासी की होती है।'  पिछले महीने ईपीएफओ न्यासी की बैठक के बाद गंगवार ने कहा था, 'वर्तमान परिदृश्य और तमाम विचार विमर्श के बाद हमने ब्याज दर 8.55 फीसदी रखने का निर्णय किया। हमारे पास समुचित अधिशेष है। हमें उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय इसे मंजूरी दे देगा।'

कीवर्ड वित्त मंत्रालय, भविष्य निधि संगठन, ईपीएफओ, ब्याज दर, श्रम, रोजगार, EPFO, CBT, Labour, Employment,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक