कर संग्रह प्रक्रिया को लेकर आयकर अधिकारियों में बेचैनी

श्रीमी चौधरी | मुंबई Apr 11, 2018 08:50 PM IST

वित्त वर्ष 2018 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य पूरा करने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया के खिलाफ कर अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है।  सूत्रों के अनुसार 10.05 लाख करोड़ रुपये के संशोधित राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के लिए बनाए गए दिशानिर्देशों और अपनाई जा रही प्रक्रिया से आयकर अधिकारी खुश नहीं है। राजस्व अधिकारियों ने पिछले हफ्ते हुई बैठक में इस मुद्ïदे को उठाया था। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए इस मसले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और वित्त मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग करने के अलावा एक प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। 
 
बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए आंकड़ों के मुताबिक 10.05 लाख करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य के मुकाबले 28 मार्च तक कुल प्रत्यक्ष कर (शुद्घ संग्रह) 9.28 लाख करोड़ रुपये रहा। 2 अप्रैल को सीबीडीटी ने कहा कि 2017-18 में 10.05 लाख करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य के मुकाबले प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.95 लाख करोड़ रुपये रहा। इसी तरह, पिछले वर्ष के 5.43 करोड़ आयकर रिटर्न के मुकाबले इस वर्ष 6.84 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए, इस प्रकार इसमें 26 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। 
 
सूत्र के मुताबिक, एक बड़े सार्वजनिक बैंक और उसके सहायक बैंकों के मूल्यांकन का आदेश जारी हुआ है। इस काम को मार्च 2019 तक पूरा किए जाने की समय सीमा तय की गई है। इन उपायों से लगभग 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर संग्रह बढ़ा है। लगभग 1,000 नोटिस भेजे चुके हैं और लोगों को अतिरिक्त अग्रिम कर के भुगतान के लिए बुलाया जा रहा है। दो वरिष्ठï अधिकारियों ने कहा कि बड़े कारोबारी घरानों और सरकारी फर्मों के रिफंड को रोकने का निर्णय भी लिया गया है ताकि कर संग्रह की राशि को बढ़ाया जा सके। कुछ महत्त्वपूर्ण संपत्तियोंं की जब्ती भी की गई है। 
 
कर अधिकारियों की इस सक्रियता के पीछे याची शिरडी स्थित साई बाबा संगठन ट्रस्ट के हक में 27 मार्च को आया बंबई उच्च न्यायालय का फैसला है। न्यायालय ने कहा था, 'हम सीबीडीटी को निर्देश देते हैं वह अधिकारियों को 31 मार्च तक अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए अतिउत्साही नहीं होने के लिए जरूरी कदम उठाए।' 
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