ई-वे बिल ने घटाई ट्रकों से ढुलाई

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Apr 13, 2018 09:54 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत राज्य के भीतर सामान की आवाजाही के लिए ई-वे बिल लागू होने के पहले 12 दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा के सामान की सड़कों से माल ढुलाई सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम हुई है। ट्रकों की आवाजाही पर नजर रखने वालों ने यह जानकारी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिल के डर से कारोबारियोंं द्वारा 31 मार्च तक भंडारण कर लेने के कारण ऐसा हुआ है।  एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच सामान की आवाजाही के लिए ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू किया गया था। 
 
इंडियन फाउंडेशन आप ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो और कोऑर्डिनेटर एसपी सिंह ने कहा, 'ट्रांसपोर्टरों द्वारा ढुलाई 1 अप्रैल 2018 से प्रभावित ुहई है और यह सामान्य ढुलाई से करीब 15 प्रतिशत कम है। कारोबारियों ने 31 मार्च तक बड़ी मात्रा में भंडारण कर लिया था।'  ट्रक मालिक इस गिरावट की भरपाई कृषि उत्पादों की ज्यादा लदान से कर रहे हैं क्योंकि रबी की फसल समय से थोड़ा पहले तैयार हो गई है। बहरहाल तूफान और बेमौसम बारिश का भी असर पड़ा है।  कृषि उत्पादों को जीएसटी से छूट मिली हुई है और इसके लिए ई-वे बिल बनाने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में इस क्षेत्र मेंं 1 अप्रैल के पहले भंडारण बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। 
 
एसपी सिंह का कहना है कि कृषि उत्पादोंं की ढुलाई भी अब 10-15 प्रतिशत कम हुई है। कुल मिलाकर ईवे बिल और खराब मौसम की वजह से लदान करीब 30 प्रतिशत कम हुई है।  गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल ने राज्य के भीतर 1 किलोमीटर से ज्यादा दूरी की आवाजाही पर ई-वे बिल की पेशकश की है। जीएसटी नेटवक4 की ओर से जारी किए गए आंकड़ोंं के मुताबिक इन राज्योंं मेंं 8 अप्रैल तक 61 प्रतिशत ई-वे बिल जेनरेट हुआ था। कर्नाटक ने पहले ही राज्य के भीतर माल ढुलाई के लिए 1 अप्रैल से ई-वे बिल लागू कर दिया है। 
 
आंकड़ोंं से पता चलता है कि 9 अप्रैल तक 63 लाख ई-वे बिल जेनरेट हुए। इसका मतलब है कि औसतन प्रतिदिन 7,00,000 बिल जेनरेट हुए हैं। शुरुआती दिनों में ई-वे बिल जेनरेशन जहां सुस्त था, बाद में इसने रफ्तार पकड़ ली।  ईवाई के पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि भंडारण करना कम अवधि की समस्या है, यह अगले 5-6 दिन में नहींं होगी। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल के पहले कंपनियों के वित्तीय वर्ष के समापन की वजह से भी लक्ष्य पूरा करने के लिए भंडारण बढ़ा। उन्होंने कहा कि धीरे धीरे सामान की आवाजाही बढ़ेगी।
 
इसके अलावा ई-वे बिल जेनरेशन उस समय गति पकड़ेगा, जब सभी राज्य अपने राज्य के भीतर वस्तुओं की आवाजाही पर इसे लागू कर देंगे। बड़ी कंपनियों जैसे एचयूएल या आईटीसी ने राज्य के भीतर करीब 80 प्रतिशत सामान की आवाजाही ई-वे बिल से कर दिया है। बहरहाल राज्य के भीतर ज्यादातर ढुलाई मझोले स्तर की कंपनियां करती हैं। सभी राज्यों ने चरणबद्ध तरीके से 30 मई तक राज्य के भीतर माल ढुलाई के लिए ई-वे लागू करने का फैसला किया है।   जैन ने कहा कि ग्राहकों से मिल रहे फीडबैक से पता चलता है कि पोर्टल सही काम कर रहा है।
कीवर्ड e way bill, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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