आरक्षित मूल्य से कम पर आवंटित हुईं सड़कें

मेघा मनचंदा | नई दिल्ली Apr 16, 2018 09:55 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों के बाद सड़क क्षेत्र ने बेहतरीन वृद्धि दर हासिल की है। इंजीनियरिंग, खरीद निर्माण (ईपीसी) मॉडल पर आवंटित करीब 80 प्रतिशत परियोजनाओं की बोली बुनियादी ढांचा डेवलपरों ने आरक्षित राशि से कम पर लगाई। इन परियोजनाओं के निर्धारित समय पर पूरी होने की संभावना है। समय से काम पूरा हो, इसके लिए जरूरी मंजूरियां पहले ही ले ली गई हैं। आरक्षित मूल्य से कम पर निवेशकोंं द्वारा बोली लगाए जाने की एक वजह यह रही कि इन परियोजनाओं के लिए बोली के लिए योग्यता सीमा कम रखी गई थी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जनवरी 2017 में राजमार्ग ठेकों के लिए योग्यता के मानदंडों को कम किया था। 
 
उदाहरण के लिए जनवरी 2017 के पहले अगर कोई कंपनी 1,000 करोड़ रुपये के ठेके के लिए बोली लगाना चाहती थी तो उसे बोली लगाने के पहले 500 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी करने की योग्यता जरूरी थी। मंत्रालय के फैसले के बाद अगर किसी कंपनी ने 250 करोड़ रुपये का काम पूरा किया हो, वह भी 1,000 करोड़ रुपये के ठेके की बोली में हिस्सा ले सकती है।  मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'इस फैसले के बाद तमाम मझोले आकार और छोटे आकार की कंपनियां बोली में हिस्सा लेने योग्य हो गईं और एक सड़क के ठेके के लिए निवेशकोंं का आधार बड़ा हो गया।'
 
इसके पहले बड़े कॉन्ट्रैक्टरों को ये ठेके सरकार से मिलते थे और वे छोटे आकार की कंपनियों को उप ठेकेदार के रूप में परियोजना पूरी करने का काम सौंप देते थे।  अधिकारी ने कहा, 'नई व्यवस्था लागू होने के बाद मझोले आकार के ठेकेदारों को यह परियोजनाएं प्राथमिक कॉन्ट्रैक्टर के रूप में मिलने लगीं और उन्हें उस ठेके पर खुद काम करना है।'  योग्यता का नया मानक पिछले साल जनवरी से प्रभाव में आया और उसके बाद दिए गए 80 प्रतिशत ठेके आरक्षित मूल्य से कम पर दिए गए।  बड़ी परियोजनाओं की सलाहकार केपीएमजी इंडिया के पार्टनर पुनीत नारंग ने कहा, 'सरकार जो कह रही है, उसकी बात में वजन है। निर्माण की मात्रा बढ़ाए जाने से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।' 
 
उन्होंने कहा कि 3 चीजों पर ध्यान होना चाहिए- बाधाएं दूर हों, काम करने की स्वतंत्रता हो और यह सुनिश्चित हो कि ईपीसी में कुशल उप ठेकेदार और प्रशिक्षित कार्यबल लगाया गया है। इसके अलावा परियोजना की निगरानी, योजना और नियंत्रण बेहतर होना चाहिए।  2017-18 में एनएचएआई ने 7,400 किलोमीटर लंबी 150 सड़क परियोजनाएं आवंटित कीं, जिनकी लागत 1,22,000 करोड़ रुपये है। पिछले 5 साल में एनएचएआई द्वारा आवंटित सड़क परियोजनाओं की औसत लंबाई 2,860 किलोमीटर रही है, जिसमें से पिछले वित्त वर्ष मेंं 4,335 किलोमीटर लंबी परियोजनाएं आवंटित हुई हैं। 
 
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