मार्च में महंगाई दर में आई कमी

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Apr 16, 2018 09:56 PM IST

टमाटर जैसी जिंसों को लेकर किसानों की चिंता बढऩे से मार्च महीने में खाद्य वस्तुओं के थोक दाम में कमी आई है। इसकी वजह से मार्च महीने में महंगाई दर मामूली घटकर 2.47 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 2.48 प्रतिशत थी। तेल के दाम बढऩे का असर खाद्य महंगाई पर बेअसर हो गई।  मार्च महीने में खाद्य पदार्थों के दाम में 0.29 प्रतिशत की कमी आई, जिसमें फरवरी में 0.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। खाद्य में सब्जियों के दाम में 2.70 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इसके पहले इसकी कीमतेंं 5.26 प्रतिशत बढ़ी थीं। 
 
सब्जियों में टमाटर के दाम थोक मूल्य सूचकांक में 26.48 प्रतिशत गिरे हैं। मार्च में सूचकांक 92.7 अंकों पर रहा, जिसका मतलब है कि टमाटर का औसत दाम उतने पर आ गया, जितना 2011-12 में था।  इस तरह की खबरें आ रही हैं कि चिंतित किसानों ने देश के विभिन्न इलाकों में टमाटर की आपूर्ति बढ़ा दी। डब्ल्यूपीआई किसानों को मिलने वाले भाव को जानने का बेहतरीन तरीका है।  इंडिया रेटिंग्स के निदेशक सुनील कुमार सिन्हा ने इसके पहले कहा था कि पहले आलू और उसके बाद टमाटर की वजह से किसानों की चिंता बढ़ी है। दलहन की कीमतों में अब कई महीनों से लगातार कमी आ रही है। मार्च में कीमतों में गिरावट घटकर 20.58 प्रतिशत रह गई जो इसके पहले महीने में 24.51 प्रतिशत थी। 
 
सिन्हा ने कहा कि तमाम दालों की कीमतें मध्य प्रदेश सहित देश के कुछ इलाकों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे हैं। बहरहाल खाद्य महंगाई दर ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम कर दिया। रसोई गैस की कीमतें भी कम हुईं हैं। ईंधन और बिजली की महंगाई दर मार्च महीने में 4.70 प्रतिशत बढ़ी है, जो पिछले महीने मेंं 3.81 प्रतिशत थी।  सिन्हा ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतेंं 70 डॉलर प्रति बैरल चल रही हैं और गर्मी बढऩे के साथ फलों व सब्जियों के दाम पर इसका विपरीत असर होगा। आने वाले कुछ महीनों में महंगाई दर को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक अपनी नीतिगत दरों का फैसला करेगा, जिसने अभी तक दरों में बदलाव न करने का फैसला किया है। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के वैश्विक दाम में बढ़ोतरी के साथ हाल में डॉलर की तुलना में रुपये मेंं गिरावट अप्रैल महीने में महंगाई दर बढ़ा सकते हैं। 
 
मार्च महीने में प्रमुख महंगाई (विनिर्मित उत्पादों की) दर में 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो इसके पहले महीने में 3.9 प्रतिशत थी। खुदरा मूल्य सूचकांक के संकेतक की तुलना मेंं यह थोड़ी विपरीत स्थिति है, जहां मार्च महीने में प्रमुख महंगाई दर 43 महीने के उच्च स्तर पर रही।  सिन्हा का कहना है कि इससे संकेत मिलते हैं कि मांग बहाल हो रही है। 
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