रेलवे की यात्री किराये से बढ़ी कमाई

शाइन जैकब | नई दिल्ली Apr 17, 2018 10:06 PM IST

साल 2017-18 में भारतीय रेलवे ने यात्रियों से सर्वाधिक कमाई की है। इस साल रेलवे की आमदनी 4.2 प्रतिशत बढ़कर 490 अरब रुपये हो गई जो कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 470 अरब रुपये थी। पिछले दो वर्ष में रेलवे ने यात्रियों की संख्या में आ रही गिरावट के रुझान को पलट दिया है।

2017-18 में यात्रियों की कुल संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले 0.82 प्रतिशत की वृद्घि हुई है।  वहीं 2016-17 में यात्रियों की संख्या में 1 प्रतिशत बढ़ोतरी और 2015-16 में 3 प्रतिशत, 2014-15 में 2.5 प्रतिशत और 2013-14 में 3 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई।

प्रीमियम ट्रेनों में लचीला किराया प्रणाली (फ्लेक्सीफेयर) की चुनौती के बावजूद आंकड़े बताते हैं कि यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) से खरीदे गए टिकटों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 6.5 प्रतिशत बढ़कर 55.6 करोड़ हो गई।

रेलवे बोर्ड के सदस्य, ट्रैफिक मोहम्मद जमशेद ने कहा, 'लचीला किराया प्रणाली से हमें लगभग 8.6 अरब रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला है। इसके अलावा टिकट जांच से भी राजस्व में 19.35 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्घि हुई है।'  

इस बीच 2017-18 के दौरान रेलवे ने 116.166 करोड़ टन माल की ढुलाई की, जो कि पिछले वर्ष के 110.879 करोड़ टन के मुकाबले 4.7 फीसदी अधिक है। इस साल सर्वाधिक 55.5 करोड़ टन कोयले की ढुलाई की गई और बिजली क्षेत्र के बढ़ती मांग की वजह से 2018-19 में इसमें 2 करोड़ टन की और वृद्घि होने की उम्मीद है।

समीक्षाधीन वित्त वर्ष के लिए शुरुआती मालभाड़ा आमदनी 8.09 प्रतिशत बढ़कर साल भर में 84.61 अरब रुपये हो गया। ढुलाई वाले डिब्बों के प्रतिदिन लदान का औसत 2016-17 में 103.4 डिब्बों से बढ़कर 2017-18 में 116 हो गया।

जमशेद ने आगे कहा कि डबल स्टैक कंटेनर के लिए मालभाड़े में छूट, खाली डिब्बों के जाने की दिशा में स्वत: भाड़ा छूट योजना का उदारीकरण, 1,500 किलोमीटर से ऊपर और 3,500 किलोमीटर तक के दूरी स्लैब का पुनगर्ठन, बंदरगाह शुल्कों की वापसी, सीमित अवधि की छूट की पेशकश और खुले में भरे हुए माल के लदान एवं फ्लैट डिब्बों पर छूट, स्टेशन से स्टेशन रियायत दर और जिंसो के वर्गीकरण में पुनर्गठन जैसे निर्णयों ने भारतीय रेलवे को मालवाहन से बेहतर कमाई करने में सफलता मिली। रेलवे की मालढुलाई से कमाई ऐसे वक्त बढ़ रही है जब रेलवे पूर्वी और पश्चिमी समर्पित मालढुलाई गलियारों को शुरू करने जा रहा है। ये अप्रैल 2020 से चालू होंगे।

रेलवे कई उपायों के जरिये 2030 तक माल ढुलाई तिगुना कर 3 अरब टन करने की योजना बना रहा है। सरकार की रणनीति कुल माल ढुलाई में रेलवे की मौजूदा 35 प्रतिशत की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना है।  रेलवे 2018-19 में रेल के डिब्बे और इंजन- जिसमें डीजल और इलेक्ट्रिक रेल, डिब्बे और यात्री कोच शामिल है पर 318 अरब रुपये निवेश करने जा रहा है। रेलवे एक महीने के भीतर 38,000 डिब्बों का एकमुश्त टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है।

 

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