गैजप्रोम से अगले माह आएगी एलएनजी

शाइन जैकब | नई दिल्ली Apr 20, 2018 10:55 PM IST

भारत मई में गैजप्रोम से पहला तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का कार्गो लाने को है। रूस की कंपनी और गेल इंडिया के बीच जनवरी महीने में नए फॉर्मूले के तहत कीमतों में कमी लाने पर सहमति बनी है, उसके बाद एलएनजी आने वाली है। कंपनी चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम 80 यूएस कार्गो भी लाने की योजना बना रही है। इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, 'हम मई के पहले पखवाड़े में गैजप्रोम से एलएनजी की पहली खेप आने की उम्मीद कर रहे हैं। हमने पहले ही उनसे नए फार्मूले के तहत कीमतों पर बात कर ली है।' दोनों कंपनियोंं के बीच हुए अनुबंध के मुताबिक गेल सालाना करीब 25 लाख टन एलएनजी गैजप्रोम से लाएगी। 

कुछ सप्ताह पहले अमेरिका से एलएनजी कार्गो महाराष्ट्र के दाभोल स्थित रीगैसीफिकेशनल टर्मिनल पर पहुंचा था। उसके बाद गैजप्रोम से खेप आने वाली है। गेल ने पहले ही डोमिमियन एनर्जी कोव प्वाइंट प्रोजेक्ट मैरीलैंड और चेनीयरे एनर्जी की लुसियाना स्थिति सेवाइन पास परियोजना के साथ 20 साल के लिए 32 अरब डॉलर की आपूर्ति के लिए समझौता किया है। उन्होंने कहा, 'चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब 80 और कार्गो लाने की योजना है, जो करीब 50 लाख टन होगा।' कुल वैश्विक एलएनजी शिपमेंट मेंं एशिया की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है। भारत तेजी से उभरता बाजार बन रहा है। 

गेल पहले ही आयातिग एलएनजी की आपूर्ति के लिए नए उर्वरक संयंत्रों के साथ बातचीत कर रही है। साथ ही वह प्रमुख ग्राहकों जैसे रिफाइनरों, बिजली संयंत्रों और पेट्रोकेमिकल इकाइयोंं के साथ बात कर रही है, जो उसकी मौजूदा और योजनाधीन पाइपलाइनों के निकट हैं। विभिन्न बाजारों से एलएनजी लो के लिए कंपनी ने दीर्घावधि खरीद समझौता किया है, जिससे बिजली क्षेत्र में बढ़ती मांग पूरी हो सके। बहरहाल सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों से सस्ती उपलब्धता की वजह से पिछले कुछ वर्षों में एलएनजी की मांग घटी है। इसकी वजह से करीब 25,000 मेगावॉट क्षमता की गैस आधारित परियोजनाएं अधर में अटकी हैं। 

गेल ने दिसंबर 2011 में चेनियरे एनर्जी के साथ बिक्री व खरीद समझौता (एसपीए) किया था। सौदे के मुताबिक चेनियरे करीब 25 लाख टन एळएनजी सालाना गेल को बेचेगी। अधिकारी ने कहा, 'यह दोनों एलएनजी हमारी पहुंच में होने के बाद हम दुनिया के बड़े आपूर्तिकर्ता बनने की ओर हैं।' पिछले साल राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ऊर्जा साझेदारी के तहत भारत व अमेरिका तेल, गैस, ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा और कोयला क्षेत्र मेंं साथ मिलकर काम करने को सहमत हुए थे। 
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