'कर भुगतान को प्रॉविजनल क्रेडिट से अलग करें'

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Apr 20, 2018 10:58 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए प्रोविजनल इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर आम राय बनाने की कवायद करने में जुटे मंत्रियोंं के एक समूह से हिस्सेदारों ने कहा है कि कर भुगतान से क्रेडिट को अलग किया जाना चाहिए। सभी सुझाव मिलने के बाद समिति एक मसौदा तैयार करने की और उसे सामान्य व एकल स्वरूप में लाने के उद्देश्य से विचार के लिए जीएसटी परिषद को सौंपेगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया है कि प्रॉविजनल क्रेडिट खरीदारों द्वारा इनवाइस की स्वीकार्यता के आधार पर दिया जाना चाहिए और इसे आपूर्तिकर्ता द्वारा किए गए भुगतान से नहींं जोड़ा जाना चाहिए। 

डेलॉयट इंडिया में वरिष्ठ निदेशक सलोनी रॉय ने कहा, 'मिलान करने की अवधारणा में चिंता का विषय यह है कि अगर खरीदार ने अपने आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया है और आपूर्तिकर्ता ने अगर अपनी आपूर्ति, जमा किए गए कर की रिपोर्ट नहीं की है तो खरीदार को क्रेडिट देने से इनकार कर दंडित किया जाएगा। इस पहलू पर फिर से विचार किए जो की जरूरत है और आपूर्तिकर्ता के व्यवहार के लिए खरीदार को सजा नहीं दी जानी चाहिए।' मार्ग ईआरपी के प्रबंधक प्रकाश माहेश्वरी ने कहा कि कारोबार जगत मांग कर रहा है कि प्रॉविजनल क्रेडिट उस स्थिति में भी दिया जाना चाहिए, अगर आपूर्तिकर्ता ने कर का भुगतान नहीं किया है।  सीआईआई ने सुझाव दिया है कि प्राप्तकर्ता को एक विकल्प दिया जाना चाहिए कि अगर आपूर्तिकर्ता ने कर भुगतान करने में चूक की है तो आपूर्तिकर्ता को कर का भुगतान रोका जाना चाहिए और कर का भुगतान सीधे सरकार को किया जाना चाहिए। 

सरकार ने जीएसटीआर 2 यानी खरीदार का रिटर्न और जीएसटीआर 3 यानी इनपुट आउटपुट रिटर्न लंबित कर दिया था और जीएसटी नेटवर्क के चेयरमैन एबी पांडेय की अध्यक्षता वाली समिति से कहा था कि रिटर्न के सरलीकरण के लिए सुझाव दिया जाए। एबी पांडेय ने जीओएम को अलग विकल्प दिए। रिटर्न को सरल किए जाने के पहले तक जीएसटीआर1 यानी सेलर्स रिटर्न और जीएसटीआर3बी लागू किया गया है। 
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