ताइवान से एफटीए पर वार्ता हो सकती है बहाल

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Apr 22, 2018 09:46 PM IST

भारत और ताइवान 8 साल पहले मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर शुरू हुई बातचीत जल्द बहाल कर सकते हैं। इससे ताइवान से मोबाइल फोन, माइक्रोप्रॉसेटर और प्रभावशाली उपकरण ज्यादा मात्रा में भारत पहुंच सकते हैं।  आधिकारिक वार्ता अभी शुरू होनी है। ताइवान ने पिछले महीने इस मसले पर बातचीत में तेजी लाने को लेकर इच्छा जताई है। वाणिज्य मंत्रालय के  एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत का मानना है कि इससे अहम उत्पादों के चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इस समय दोनोंं देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं बल्कि एक दूसरे के देश में आर्थिक व सांस्कृतिक केंद्र मौजूद हैं। 
 
भारत ने इसके पहले ताइवान से होने वाले तेज निवेश के खिलाफ फैसला किया था क्योंकि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधोंं को लेकर हितोंं का टकराव हो रहा था। चीन इस द्वीपीय देश को अपना भूभाग मानता है और उसने पिछले 70 साल से ताइपेई सरकार को स्वीकृति देने से इनकार किया है।  भारत के साथ ताइवान का कारोबार 2016-17 में 11 प्रतिशत बढ़कर 5.32 अरब डॉलर हो गया है। ताइवान प्रभावशाली उपकरणों और उपकरण विनिर्माण का वैश्विक केंद्र है, जिसकी हिस्सेदारी भारत के बाजार में बढ़ रही है। भारत में अभी चीन से होने वाले सस्ते आयात का दबदबा है। 
 
एक वरिष्ठ ताइवानी राजनयिक ने कहा, 'भारत की ओर से पूर्ण समर्थन के हाल के आश्वासन के बाद हमने अपने विनिर्माताओं और निर्यातकों को  बेंगलूरु, हैदराबाद, अहमदाबाद जेसे शहरोंं में स्थानीय साझेदार बनाने के लिए ध्यान केंद्रित करने को कहा है। '  ताइवान एक्सटर्नल ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिल (टीएआईटीआरए) के अध्यक्ष एवं सीईओ वाल्टर एमएस येह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'निश्चित रूप से एफटीए कारोबार के लिए बेहतर होगा। बेहतर समझौता लाभदायक होगा। राजनीतिक मुश्किलों की वजह से ताइवान का ज्यादातर देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। ऐसे में हमारे उत्पाद स्वत: ही ज्यादा प्रतिस्पर्धी और बेहतर गुणवत्ता के हो गए हैं।'
 
इस समय ताइवान के साथ सिर्प 5 एफटीए हैं और चीन व सिंगापुर के साथ दो तरजीही कारोबार सौदे हुए हैं। येह ने कहा कि ज्यादादर देशों में हमारे निर्यातकों पर बहुत ज्यादा आयात शुल्क लगता है, लेकिन हमारे उत्पाद गुणवत्ता में वैश्विक स्तर के हैं।  ताइवान से ज्यादा कारोबार व निवेश होने से भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी। ताइवान की फर्मोंं को भारी मशीनरी व इंजीनियरिंग के सामान बनाने में विशेषज्ञता हासिल है। भारत चाहता है कि इन महत्त्वपूर्ण उपकरणों का विनिर्माण धीरे धीरे भारत में शुरू हो जाए, और चीन से बड़ी मात्रा में आयात होने के  बजाय अन्य देशों से भी आयात हो।  राजनयिक ने कहा कि इस समय ऐपल स्मार्टफोन का इलेक्ट्रॉनिक पार्ट असेंबल करने वाली फॉक्सकॉन 6 स्थानों पर काम कर रीह है और वह भारत में अपना कारोबार व उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है।
कीवर्ड FTA, mobile,

  
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