घरेलू वजहें रुपये के लिए ज्यादा चिंता का विषय

अनूप रॉय | मुंबई Apr 22, 2018 09:47 PM IST

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा भारत को निगरानी की सूची में डाला जाना चिंता का विषय नहीं है। करेंसी डीलरों का कहना है कि सिर्फ इस वजह से घरेलू मुद्रा पर कोई दबाव नहीं पडऩे वाला है।  भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा बाजार में समय समय पर हस्तक्षेप करता है, हालांकि वह विनिमय दर को लक्ष्य नहीं बनाता बल्कि उतार चढ़ाव की समस्या को दूर करता है। भारत में 2017 में चालू खाता घाटा भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.5 प्रतिशत हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक मध्यावधि के हिसाब से घाटा बढ़कर 2 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
 
अमेरिका के साथ 2017 मेंं भारत का वस्तुओं का सरप्लस 23 अरब डॉलर था, जो चीन के 375 अरब डॉलर की तुलना में बहुत कम है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चीन को करेंसी मैनिपुलेटर के रूप में चिह्नित करने की बात कही थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। ऐसे में इसकी संभावना कम है कि भारत पर सूची का विपरीत असर पड़ेगा। सूची में शामिल करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी 3 मानकों पर नजर रखता है- कम से कम 20 अरब डॉलर का द्विपक्षीय ट्रेड सरप्लस, चालू खाता सरप्लस और दृढ़ता। 
 
एसपी जैन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च के एसोसिएट प्रोफेसर अनंत नारायण ने कहा, 'मध्यावधि के हिसाब से देखें तो अमेरिकी ट्रेजरी रिपोर्ट बहुत असर नहींं डालेगी। हमारे बढ़ते सीएडी को देखते हुुए रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप अमेरिकी डॉलर की खरीद की संभावना है। कम अïवधि के हिसाब से देखेंं तो ट्रेजरी रिपोर्ट को देखते हुए ट्रंप प्रशासन भारत से छूट मांग सकता है जिससे अमेरिका के साथ भारत का कारोबारी घाटा सुधर सके।' भारत इसमेंं से 2 मानदंडों पर खरा उतरता है। कारोबारी सरप्लस के अलावा भारत का शुद्ध सालाना विदेशी एक्सचेंज खरीद 2017 मेंं 56 अरब डॉलर पहुंच गया, जो जीडीपी के 2.2 प्रतिशत के बराबर है। लेकिन ट्रेजरी ने कहा है 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और पोर्टफोलियो निवेश के हिसाब से मजबूत विदेशी प्रवाह खरीद में तेजी आई है।'  बगैर किसी हस्तक्षेप के डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर से ज्यादा है, जो देश के हिसाब से पर्याप्त है। 
 
आईएफए ग्लोबल के प्रबंध निदेशक अभिषेक गोयल ने कहा, 'रुपये का परिदृश्य वृहद आर्थिक मसलों जैसे तेल की कीमतों, कारोबारी घाटा आदि की वजह से सुस्त है। डॉलर कमजोर होने के बावजूद रुपये पर दबाव आ रहा है।' रुपये को निगरानी सूची में डाला जाना चिंता का विषय नहीं है, बाजार अन्य पहलुओं पर विचार कर रहा है।  गोयनका ने कहा, 'अगर प्रवाह बढऩा शुरू हुआ होता है तो निश्चित रूप से निगरानी सूची की वजहोंं से रिजर्व बैंक रुपये को मजबूती दे सकता है।' उन्हें उम्मीद है कि 3 माह में रुपया 66.50 प्रति डॉलर के स्तर पर होगा। 
 
मार्च में भारत का कारोबारी घाटा 13.7 अरब डॉलर हो गया, जो फरवरी में 12 अरब डॉलर था। नारायणन ने कहा कि 2017-18 में भारत का चालू खाता घाटा 50 अरब डॉलर हो सकता है जो पिछले 5 साल में सबसे खराब स्तर होगा। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतेंं 71.50 डॉलर प्रति बैरल होने से चालू खाता बढऩे के संकेत मिल रहे हैं। क्वांटआर्ट मार्केट सॉल्यूशंस के प्रमुख समीर लोढ़ा ने कहा, 'वैश्विक जोखिम शुरू होने के पहले अफरा तफरी की कोई जरूरत नहीं है। अगर वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है तो रुपया स्थिर रहेगा।' 
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