जीएसटी के बदलते नियम, रिफंड लंबित रहने से संकट

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Apr 25, 2018 09:51 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नियमों में निरंतर बदलाव, रिफंड के लिए इंतजार जारी रहने और प्रक्रिया संबंधी नियमों के संकट से विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) से निर्यात में कमी जारी है।  निर्यात आधारित इकाइयों व विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए बनी निर्यात संवर्धन परिषद ने बुधवार को इस क्षेत्र में आ रही प्रक्रिया संबंधी व नियामकीय समस्याओं के बारे में जानकारी दी। ईपीसीईएस के चेयरमैन विनय शर्मा ने कहा, 'पिछले साल नया कर ढांचा लागू होने के बाद 15 अप्रैल के बाद से जीएसटी नियमों में अब तक 367 बदलाव हो चुके हैं।' 
 
उन्होंने कहा कि सभी नीतियों के लिए एक तरीका जमीनी हकीकत नहीं बन पा रहा है। जीएसटी परिषद के विशेष सचिव अरुण गोयल और जीएसटी महानिदेशालय में अतिरिक्त महानिदेशक योगेंद्र गर्ग से कारोबारियों ने आवेदन किया है कि ई-वे बिल निकालने में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। जीएसटी रिफंड लंबित रहने का मसला भी निर्यातकों के लिए समस्या बना हुआ है। शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार से जहां रिफंड आना शुरू हो गया है, वहीं राज्य सरकारों का बकाया अभी लंबित है। सेज क्षेत्र के निर्यातकोंं ने दावा किया है कि उनका 60 प्रतिशत से ज्यादा रिफंड अटका हुआ है, जिसकी वजह से उनकी कार्यशील पूंजी घटी है। ईपीसीईएस ने आधिकारिक आंकड़ोंं का उल्लेख करते हुए कहा कि मार्च तक सरकार ने कुल 17616 करोड़ रुपये वापस किए हैं। 
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