जीएसटीएन को सरकारी कंपनी बनाने पर होगी चर्चा

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Apr 25, 2018 09:51 PM IST

जीएसटी परिषद की 4 मई को होने वाली अगली बैठक में जीएसटी की सूचना प्रौद्योगिकी रीढ़ वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) को सरकारी कंपनी में बदलने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली इस बैठक में रिटर्न दाखिल करने के फार्म को आसान बनाने और हवाई अड्ïडा पर शुल्क मुक्त दुकानों पर जीएसटी लगाने की अग्रिम निर्णय प्राधिकरण के हाल के निर्णय पर चर्चा हो सकती है।  एक अधिकारी ने कहा, 'परिषद सीमित एजेंडे के साथ 4 मई को फिर से बैठक करेगी। इसमें रिटर्न प्रक्रिया को आसान बनाने और अग्रिम निर्णयों पर स्पष्टïता के अलावा जीएसटीएन को एक सरकारी कंपनी में बदलने पर चर्चा होने की संभावना है।' 
 
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में परिषद जीएसटीएन को एक सरकारी तंत्र बनाने के केंद्र के  प्रस्ताव पर चर्चा करेगी। परिषद इस बात को लेकर चर्चा करेगी कि जीएसटी की इस आईटी निकाय में सरकार की मौजूदा 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 51 प्रतिशत या 100 प्रतिशत किया जाए। जेटली ने इस महीने की शुरुआत में वित्त सचिव हसमुख अढिय़ा को जीएसटीएन को एक सरकारी कंपनी में बदलने की संभावनाओं की पड़ताल करने के लिए कहा था। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'कुछ राज्यों की भी मांग है कि जीएसटीएन सरकार के स्वामित्व वाला तंत्र बने। कैंब्रिज एनालिटिका के हाथों फेसबुक डेटा लीक होने का मामला प्रकाश में आने के बाद से अब राष्टï्रीय सुरक्षा पर बहस जोर पकड़ रही है।' फिलहाल 28 मार्च, 2013 को शुरू हुए जीएसटीएन में पांच निजी संस्थाओं- एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एनएसई स्ट्रेटजिक कंपनी और एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड की संयुक्त रूप से 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसमें केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत है। परिषद से मंजूरी के बाद प्रस्ताव पर केंद्रीय कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। 
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया में साझेदार प्रतीक जैन ने कहा, 'जीएसटीएन को एक सरकारी कंपनी बनाने के लिए चर्चा से ही इसके काम करने के तरीके पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जब तक कि इसे पेशेवर तरीके से प्रबंधित नहीं किया जाता है।' जीएसटीएन के मुख्य कार्याधिकारी प्रकाश कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा था कि इसमें भर्ती और छंटनी की प्रक्रिया काफी तेज है क्योंकि यह एक निजी कंपनी है और निजी क्षेत्र का वेतन ढांचा इसे सही लोगों को चुनने में मदद करता है।  उन्होंने गोपनीयता पर चिंता को भी यह कहते हुए कम किया कि जीएसटीएन प्रारूप में गोपनीयता अंतर्निहित है। उन्होंने कहा, 'किसी भी एक व्यक्ति के पास एक करदाता की पूरी जानकारी नहीं होती है। एक व्यक्ति के पास पंजीयन आंकड़ा होता है तो दूसरे किसी के पास रिटर्न का आंकड़ा होता है। इस प्रकार एक करदाता से जुड़ी पूरी जानकारी निकालने के लिए तीन लोगों को आपस में सांठगांठ करना होगा। यहां तक कि मैं खुद भी किसी भी करदाता का पूरा विवरण नहीं देख सकता।' बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अगुआई में मंत्रियों के समूह की पिछले हफ्ते हुई बैठक में जीएसटी को आसान बनाने के निर्णय पर एकराय कामय नहीं हो सकी थी और परिषद के समक्ष चर्चा के लिए तीन विकल्पों या एक मसौदा को रखा जाएगा। राजस्वों की सुरक्षा के लिए सरकार जीएसटी रिटर्न फॉर्म को आसान बनाएगी। 
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