6 महीने में मिलीं 31.1 लाख नौकरियां

सोमेश झा | नई दिल्ली Apr 26, 2018 01:03 PM IST


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में अंशदान करने वालों की संख्या के आधार पर केंद्र सरकार ने पहली बार पेरोल का अनुमान लगाया है, जिससे पता चलता है कि छह महीने के दौरान औपचारिक अर्थव्यवस्था में 31.1 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है। हालांकि फरवरी 2018 में मासिक आधार पर जनवरी की तुलना में नौकरियों में 22 प्रतिशत की कमी आई और नौकरियों का सृजन 4 महीने के निम्न स्तर 4,72,075 व्यक्तियों पर रहा।

पेरोल की गणना ईपीएफओ में शामिल होने और उसमें खाता बंद करने वालों की संख्या के अंतर के आधार पर है, जिससे नौकरियों के शुद्ध सृजन का पता चलता है। ईपीएफओ द्वारा 6 महीने के अनंतिम आंकड़ोंं से पता चलता है कि औपचारिक क्षेत्र मेंं सितंबर 2017 से फरवरी 2018 के बीच औपचारिक क्षेत्र मेंं 31.1 लाख कामगार आए हैं। इस आधार पर अनुमान लगाया जाए तो 2017-18 में 62.2 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है।

बहरहाल यह सामान्यीकरण होगा क्योंकि सितंबर से फरवरी के बीच के आंकड़ोंं से पता चलता है कि हर महीने नौकरियां पाने वालों की संख्या में उतार चढ़ाव बहुत ज्यादा है। उदाहरण के लिए समीक्षाधीन अवधि के 6 महीनोंं से 3 महीने में नौकरियों का सृजन बहुत कम रहा। फरवरी महीने में नौकरियों के सृजन में सबसे तेज गिरावट आई है. वहींं फरवरी की तुलना में सितंबर और अक्टूबर महीने में कहीं ज्यादा लोगोंं को नौकरियां मिली हैं।  

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, 'अब फैसला किया गया है कि उम्र के हिसाब से सभी नए अंशदान करने वालों का वर्गीकरण किया जाए, जिसकी घोषणा नियोक्ता करते हैं।

यह आंकड़े नीति निर्माण, योजना बनाने व शोध मेंं सहायक हो सकते हैं। इससे यह जानकारी मिल सकेगी कि किस उम्र वर्ग के लोगों को ज्यादा नौकरियां मिली हैं।'  ईपीएफओ के पंजीकरण के आधार पर पेरोल का अनुमान लगाया है, जिससे सितंबर 2017 और फरवरी 2018 के बीच कुछ विरोधाभासी परिणाम सामने आते हैं। जनवरी मेंं गैर कृषि क्षेत्र मेंं जहां रोजगार 8.4 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं दिसंबर 2017 में पेरोल कर्मचारियों मेंं करीब 14 प्रतिशत की कमी आई है।

नवंबर महीने में पेरोल पर आने वाले कर्मचारियों की संख्या में 64.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई वहीं उसके पहले महीने में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। फरवरी महीने में नए पंजीकरण में 57 प्रतिशत से ज्यादा कामगार 18-25 साल उम्र के रहे। वहीं 35 साल से ज्यादा उम्र के कामगारों की संख्या 15 प्रतिशत रही।  पेरोल अनुमानों से एक महत्त्वपूर्ण परिणाम यह भी आया है कि 18 साल से कम उम्र और 18-25 साल उम्र के लोगोंं की नौकरियों में नवंबर महीने से लगातार कमी आई है। इस उम्र वर्ग मेंं पेरोल पर आने वाले कामगारों की संख्या पिछले 6 महीने की तुलना में फरवरी महीने में सबसे कम रही।

 यह पहला मौका है जब भारत में सरकारी एजेंसी ने उम्र के आधार पर नौकरियां पाने वालों के आंकड़े जारी किए हैं। ईपीएफओ कामगारों के सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रबंधन करता है, जिसमें संगठित और उप संगठित क्षेत्र के कामगार होते हैं। ईपीएफओ में इस समय 6 करोड़ सदस्य हैं, जो सक्रियता से अंशदान कर रहे हैं।  बहरहाल ईपीएफओ के पेरोल आंकड़ों में सिर्फ वे फर्में शामिल हैं, जिनमें 20 से ज्यादा लोग काम करते हैं। ऐसी फर्मों में भविष्य निधि खाते में अंशदान अनिवार्य किया गया है। 2013-14 की छठी आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत मेंं 99.35 प्रतिशत फर्मों में 20 से कम कर्मचारी हैं।

सरकार के पेरोल का अनुमान 'टुअड्र्स अ पेरोल रिपोर्टिंग इन इंडिया' नाम के अध्ययन के बाद आया है, जिसे भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष और इंडियन इंस्टीट्यूट आफ बेंगलूर  के प्रोफेसर पुलक घोष ने जवनरी में तैयार किया था। अध्ययन में 2017-18 में 70 लाख नौकरियों के सृजन का अनुमान लगाया गया था। घोष और घोष ने सिफारिश की थी कि मासिक पेरोल आंकड़े जारी किए जाने चाहिए।  एसबीआई के सौम्यकांति घोष ने कहा, 'शोध से पता चलता है कि सभी बेहतरीन आर्थिक रिपोर्टों और नीतिकत फैसलों मेंं पेरोल के आंकड़ों को सबसे बेहतर माना जाता है। यह अच्छी बात है कि सरकार ने हमारी सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं।'

बहरहाल नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगढिय़ा के नेतृत्व मेंं गठित कार्यबल ने ईपीएफओ, ईएसआईसी और एनपीएस के आंकड़ों के आधार पर आंकड़े तैयार करने कीी कु छ गंभीर सीमाएं बताई थीं। उसमें कहा गया था कि इन आंकड़ों में नई प्रवृष्टि का मतलब यह जरूरी नहीं कि नई नौकरियों का सृजन हुआ हो। 

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