नियमों पर अपील की व्यवस्था नहीं

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Apr 26, 2018 09:57 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत एडवांस रूलिंग प्राधिकरण (एएआर) का गठन किया गया है। प्राधिकरण ने शुल्क मुक्त दुकानों से लेकर कैंटीन सेवाओं के माध्यम से बिकने वाले सामान को लेकर अनेक फैसले किए हैं, जिन पर कर लगते हैं। उद्योग जगत इन फैसलों के खिलाफ अपील करने में सक्षम नहीं है क्योंकि अभी राज्यों ने अपीली निकाय गठित नहीं किए हैं। इसे देखते हुए उद्योग जगत जीएसटी के तहत अपील व्यवस्था के अभाल को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने पर विचार कर रहा है। उधर जीएसटी परिषद ने राज्य सरकारों से कहा है कि  वे एडवांस रूलिंग को लेकर अपीली प्राधिकरण के गठन में तेजी लाएं। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'एएआर के कई फैसले आए हैं, लेकिन अभी अपील व्यवस्था गठित की जानी बाकी है। उद्योग जगत ने इसकी शिकायत शुरू कर दी है। राज्यों से कहा गया है कि वे अपली निकाय गठित करने में तेजी लाएं।' जीएसटी कानून में एएआर रूलिंग के खिलाफ अपीली प्राधिकरण के  पास अपील की सुविधा मुहैया कराई गई है। एएआर के फैसले के 30 दिन के भीतर अपीली प्राधिकरण के समक्ष अपील करने की जरूरत होती है और इस पर 90 दिन के भीतर आदेश दिए जाने का प्रावधान है। 
 
एएआर के ज्यादातर नियम उद्योगों के खिलाफ हैं, ऐसे में यह एक चुनौतीपूर्ण वक्त है क्योंकि एएआर नियम बाध्यकारी हैं और उद्योग की दृष्टि से संदर्भ होते हैं। अब तक 19-20 एएआर रूलिंग आ चुकी हैं।  उद्योग जगत से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'कोई अपील व्यवस्था नहीं है जिसकी वजह से 30 दिन के भीतर अपील करने की हमारी समयावधि खत्म हो चुकी है। ऐसे में हम उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, जो समाधान व्यवस्था न होने को लेकर है।'
 
बहरहाल तमाम कंपनियों ने अपील व्यवस्था न होने को लेकर राज्यों व केंद्रीय अधिकारियों को पत्र लिखा है और मांग की है कि अपीली निकाय के गठन के बाद उनके आवेदन स्वीकार किए जाएं, भले ही 30 दिन की समयावधि पूरी हो चुकी हो।  इस सिलसिले में फैसला आना है, जिसे देखते हुए उद्योग इसका मूल्यांकन कर रहे हैं कि इन्हें लागू किया जा सकता है या नहीं। बहरहाल कुछ राज्यों में न्यायिक अधिकार प्राप्त आयुक्त अपील के आवेदन स्वीकार कर रहे हैं। यह व्यवस्था तब तक के लिए है, जब तक कि इसकी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती। उद्योग जगत से जुड़े एक और व्यक्ति ने, जिनका मामला घरेलूू उपकरणों के आयात से जुड़ा हुआ है,  कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। एएआर का नियम हमारी कंपनी के आयात के विरुद्ध है। मैं अपील करना चाहता हूं, जिससे कम से कम स्थगनादेश मिल जाए। लेकिन पूरी न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है। हम कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। आवर्ती आधार पर आयात हो रहा है।'खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'एडवांस रूलिंग का मकसद स्थिरता प्रदान करना था, जो फिलहाल नहीं हो रहा है। अपीली प्राधिकरण का गठन पहले दिन से होना चाहिए था। इसमेंं देरी होने से उद्योग जगत को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।' 
 
ईवाई के विपिन सप्रा ने कहा, 'एडवांस रूलिंग को लेकर विभिन्न राज्यों में अपीली प्राधिकरण का तत्काल गठन जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या मेंं एडवांस रूलिंग सामने आए हैं, जो आवेदकों के खिलाफ हैं। इस पर अपीली प्राधिकरण के फैसले के बाद ही तार्किक स्तर पर पहुंचा जा सकता है।' हाल के एएआर फैसले में यह नियम आया कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा  नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत शुल्क से मुक्त नहीं है और अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों की शुल्क मुक्त दुकानों पर खरीद पर जीएसटी लगेगा। एक जुलाई को जीएसटी लागू होने के पहले के अप्रत्यक्ष कर के दौर में शुल्क मुक्त दुकानों से खरीद पर केंद्रीय बिक्री कर और मूल्यवर्धित कर से छूट मिलती थी क्योंकि ऐसी दुकानों पर बिक्री को निर्यात माना जाता था। इसी तरह से केरल में एएआर ने नियम बनाया कि नियोक्ता द्वारा कैंटीन में कर्मचारियों के खाने पर किए जाने वाले खर्च पर जीएसटी लगेगा, जिससे जीएसटी के तहत करदाताओं पर अनुपालन का बोझ बढ़ रहा है। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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