जीएसटी से आए 7.41 लाख करोड़ रुपये

बीएस संवाददाता | नई दिल्ली Apr 27, 2018 09:41 PM IST

भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के पहले वित्त वर्ष के 8 महीने के दौरान कर संग्रह 7.41 लाख करोड़ रुपये रहा है। इस तरह से औसत मासिक कर संग्रह सरकार के शुरुआती लक्ष्य की तुलना में कम है। जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ और इस तरह से सरकार को नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत कर संग्रह के लिए 8 महीने ही मिले हैं।  जीएसटी से औसत मासिक कर संग्रह 89,000 करोड़ रुपये रहा, जो 92,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य की तुलना में कम है।  वित्त मंत्रालय ने एक बयान मेंं कहा है, '2017-18 के दौरान जीएसटी के तहत अगस्त 17 से मार्च 18 के बीच कुल कर संग्रह 7.19 लाख करोड़ रुपये रहा है।' 
 
इसमेंं 1.19 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), 1.72 लाख करोड़ रुपये राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) और 3.66 लाख करोड़ रुपये एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी-जिसमें 1.73 लाख करोड़ रुपये आयात पर कर शामिल है) और 62,021 करोड़ रुपये उपकर से संग्रह  (इसमें 5,702 करोड़ रुपये आयात पर) शामिल है।  घरेलू आपूर्ति पर एक महीने में कर संग्रह रिटर्न की प्रक्रिया से हुआ है और इसका संग्रह अगले महीने में हुआ है, वहीं आयात पर एकीकृत जीएसटी और और उपकर का संग्रह उसी महीने में हुआ है। 
 
ऐसे में जहां घरेलू आपूर्ति पर जीएसटी का संग्रह अगस्त  17 से मार्च 2018 के बीच का सिर्फ 8 महीनोंं के लिए हुा है, वहीं आईजीएसटी और उपकर का संग्रह जुलाई 2017 से मार्च 2018 के बीच 9 महीनों का हुआ है।  सरकार ने कहा है, 'जुलाई 2017 के संग्रह को शामिल करके वित्त वर्ष 2017-18 में कुल जीएसटी संग्रह अनंतिम रूप से 7.41 लाख करोड़ रुपये है।'  पुनरीक्षित अनुमान में जीएसटी संग्रह 4.44 लाख करोड़ रुपये हो गया था। वहीं शुक्रवार को सरकार की ओर से जारी वास्तविक आंकड़ों के मुताबिक केंद्र का संग्रह 4.5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार जा 2018-19 के लिए जीएसटी संग्रह का लक्ष्य 7.43 लाख करोड़ रुपये है।
 
ईवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, 'बजट में रखे गए जीएसटी से कर वसूली का लक्ष्य 2018-19 में हासिल करने के लिए कर संग्रह में मासिक 24 प्रतिशत बढ़ोतरी की जरूरत होगी। वित्त वर्ष 2017-18 में मासिक कर संग्रह 90,000 करोड़ रुपये के करीब रहा है।'  कर में बढ़ोतरी का अनुमान बहुत ज्यादा है, लेकिन यह संभव है क्योंकि ईवे बिल पेश किए जाने व कर चोरी रोकने के अन्य प्रावधानों जैसे टीडीएस, टीसीएस आदि का फायदा होगा।  मार्च महीने के आखिर में केंद्र सरकार के उपकर खाते मेंं 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त है, जिसका इस्तेमाल राज्योंं को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। 
 
वस्तुओंं के एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही और आयात पर एकीकृत जीएसटी लगता है, जो केंद्र के खाते में जाता है। जीएसटी के ऊपर उपकर विलासिता की वस्तुओं और हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाता है, जिससे राज्यों को होने वाली किसी भी राजस्व की कमी की भरवाई की जाएगी।  पिछले वित्त वर्ष में 8 महीने के दौरान राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई 41,147 अरब रुपये की गई। पिछले 8 महीनों मेंं हर राज्य में राजस्व का अंतर धीरे धीरे कम हुआ है। पिछले साल के दौरान सभी राज्यों का राजसस्व अंतर करीब 17 प्रतिशत रहा है।
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'मार्च के लिए संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। साथ ही 1 अप्रैल से ईवे बिल पेश कि ए जान के बाद से कर संग्रह में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार आने वाले दिनों में करों को तार्किक करने पर विचार कर सकती है। खासकर 28 प्रतिशत के उच्च कर ढांचे में कमी कर उन वस्तुओंं को 18 प्रतिशत कर ढांचे में डाला जा सकता है।'  टैक्समैन में डीजीएम, जीएसटी विशाल रहेजा ने कहा, 'आंक ड़ोंं से निश्चित रूप से पता चलता है कि कर संग्रह में सुधार हो रहा है और जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की राजस्व की खाईं संकरी हो रही है, जो कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर संकेत है। कुल मिलाकर राज्यों का राजस्व अंतर कम होने से पेट्रोलियम और शराब को जीएसटी के दायरे में लाने की राह मजबूत होगी।' 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक