जीएसटी संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये के पार

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली May 01, 2018 09:32 PM IST

अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये हुआ जीएसटी संग्रह
वित्त मंत्री ने इसे अर्थव्यवस्था में तेजी का बताया संकेत

अप्रैल माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। पिछले साल जुलाई में जीएसटी के लागू होने के बाद से यह किसी एक महीने में सबसे ज्यादा कर संग्रह है। अप्रैल में करीब 69.5 फीसदी करदाताओं ने इनपुट-आउटपुट सारांश दाखिल किया है जबकि पिछले महीने 64.61 फीसदी ने इसे भरा था।  जीएसटी लागू होने के शुरुआती आठ महीनों में औसत मासिक संग्रह 898.8 अरब रुपये रहा है लेकिन अप्रैल में यह 1.03 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

कर संग्रह बढऩे से उत्साहित केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिलते हैं। उन्होंने ट्वीट किया, 'अप्रैल में जीएसटी संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया, जो बड़ी उपलब्धि है और यह आर्थिक गतिविधियों में तेजी की भी पुष्टिï करता है।' हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल के संग्रह को रुझान नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर लोग वित्त वर्ष के अंतिम महीने में पिछले महीनों के बकाया का भुगतान करने का प्रयास करते हैं, इसलिए इस महीने के राजस्व को भविष्य के रुझान के तौर पर नहीं देखा जा सकता।'

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा, '1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना जीएसटी के सफर का अहम पड़ाव है और अब हम उम्मीद करते हैं कि राजस्व इस दायरे में स्थिर होगा क्योंकि कर चोरी रोकने के कई उपाय किए गए हैं।' वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े पूरे अप्रैल महीने के भुगतान के हैं।

इससे पहले तक महीने की 20 तारीख तक के कर भुगतान का आंकड़ा जारी किया जा रहा था अगर केंद्र और राज्य सरकारें 1 लाख करोड़ रुपये कर संग्रह करने में सफल रहती हैं तो वे 2018-19 में 12 लाख करोड़ रुपये जुटाने में सक्षम होंगी, जो बजट प्रावधान और राज्य राजस्व संग्रह में 14 फीसदी सालाना वृद्घि से थोड़ा अधिक हो सकता है। केंद्रीय बजट में 2018-19 में जीएसटी राजस्व 7.4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। अगर मुआवजा उपकर करीब 900 अरब रुपये निकाल लिया जाए तो यह 6.5 लाख करोड़ रुपये होगा।

राज्य जीएसटी 2017-18 के पहले आठ महीनों में 2.91 लाख करोड़ रुपये रहा। ऐसे में 12 महीने में यह 4.4 लाख करोड़ रुपये होता है। राज्य जीएसटी में 14 फीसदी वृद्घि को इसमें शामिल करें तो इसे 5 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए और कुल राजस्व 11.5 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए।  हालांकि एकीकृत जीएसटी में कुछ दोहराव भी होंगे क्योंकि राज्यों के पहले आठ महीने के जो आंकड़े दिए गए हैं, उसमें जुलाई महीने के आईजीएसटी को भी शामिल किया गया था।

हालांकि वित्त मंत्रालया ने कहा, 'जीएसटी राजस्व में तेजी अर्थव्यवस्था में तेजी और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।' केंद्रीय जीएसटी से अप्रैल में 186.52 अरब रुपये संग्रह किया गया, वहीं राज्य जीएसटी से 257.04 अरब रुपये, एकीकृत जीएसटी से 505.48 करोड़ रुपये संग्रह किए गए।

अप्रैल में निपटान के बाद सीजीएसटी 324.93 अरब रुपये और एसजीएसटी 402.57 अरब रुपये रहा।पीडब्ल्यूसी में अप्रत्यक्ष कर के पार्टनर एवं लीडर प्रतीक जैन ने कहा, 'साल खत्म होने और समायोजन से थोड़ा बढ़ावा मिल लेकिन इतना स्पष्टï है कि अनुपालन में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। ई-वे बिल के लागू होने से अप्रैल में जीएसटी संग्रह (मई में भुगतान होगा) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।'

ईवाई में पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, 'कर चोरी रोकने के उपायों जैसे ई-वे बिल, क्र्रेडिट मिलान, स्रोत पर का संग्रह आदि से चालू वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह और बढ़ सकता है।'कंपोजिशन डीलरों को तिमाही आधार पर कर भुगतान करना होता है और इस तिमाही के लिए उन्होंने 5.79 अरब रुपये का भुगतान किया। 19 लाख कंपोजिशन डीलरों में से 11 लाख ने तिमाही रिटर्न दाखिल किया है।

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