पहले भी बदले हैं वित्त आयोग के विषय

ईशान बख्शी | नई दिल्ली May 08, 2018 09:43 PM IST

इस समय गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उन विषयों में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जिन पर 15वें वित्त आयोग को सिफारिश करने को कहा गया है। जानकारों का कहना है कि वित्त आयोगों के विचारार्थ विषय (टीओआर) में पहले भी बदलाव किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टीओआर में कुछ जोडऩे या उसमें संशोधन करने का काम पहले भी हो चुका है। 15वें वित्त आयोग के खास कार्यों  और संदर्भों की आलोचना बहस का विषय हो सकता है।  उदाहरण के लिए तेलंगाना राज्य बनाए जाने के साथ 14वें वित्त आयोग के टीओआर मेंं बदलाव किया गया था, जिससे कि आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद नव सृजित राज्य के बारे मेंं सिफारिशें दी जा सकें। 
 
दरअसल 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष और रिजर्व बैंंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने 2 महीने के लिए कार्य विस्तार की मांग की थी, जिससे कि वे आंध्र प्रदेश व तेलंगानाकी सरकारों के साथ बातचीत कर सकें और वित्तीय अनुमानों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप सकें। 31 अक्टूबर 2014 को रिपोर्ट सौंपने के बजाय आयोग ने अपनी रिपोर्ट 15 दिसंबर 2014 को पेश की। 11वें वित्त आयोग के टीओआर में भी बदलाव किया गया था। टीओआर में आयोग को प्रदर्शन आधारित राजस्व घाटा अनुदान देने का अधिकार देने संबंधी प्रावधान डाला गया था। 
 
तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने 28 अप्रैल 2000 को दिए गए आदेश में कहा था 'आयोग खासकर निगरानी किए जा सकने वाले वित्तीय सुधार कार्यक्रम का खाका तैयार कर सकता है, जिसका मकसद राज्य के राजस्व घाटे में कमी लाना हो। वह ऐसे तरीकों का सुझाव दे सकता है, जिसमें गैर योजनागत व्यय में अनुमानित घाटे को लेकर अनुदान दिए जाने का प्रावधान हो और वह कार्यक्रमों को लागू करने में होने वाली प्रगति से जुड़ा हो।' इसके साथ ही राजस्व घाटा अनुदान राज्यों को वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने से होने वाले घाटे की भरपाई करने हेतु दिए जाने की व्यवस्था थी। 15वें वित्त आयोग से इसकी समीक्षा करने को कहा गया है। राज्य सरकारें इस टीओआर का विरोध कर रही हैं। 
 
सरकार के अधिकारियों ने कहा कि कुछ राज्य सरकारों के विरोध के बावजूद टीओआर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किए जाने से उनके साथ भेदभाव होगा। इसके अलावा कुछ अन्य मसले भी हैं। राज्य यह भी चाहते हैं कि 1971 के आंकड़ों का इस्तेमाल जारी रहना चाहिए। पिछले महीने वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि टीओआर को लेकर मतभेद अनावश्यक है और उन राज्यों के साथ भेदभाव किए जाने की कोई संभावना नहीं है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बेहतर काम किया है। आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में सोमवार को हुई बैठक में शामिल राज्यों ने मांग की कि उनका आकलन नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया 2022 के विकास लक्ष्यों या केंद्र की योजनाओं को लागू किए जाने या वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आने के आधार पर नहींं किया जाना चाहिए।
 
15वें वित्त आयोग के टीओआर मेंं यह विचार करना अनिवार्य बनाया गया है कि राज्यों को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन मिले। जिन मानकों के आधार पर उनका आकलन हो सकता है, उसमें यह शामिल है कि केंद्र सरकार की योजनाओं को उन्होंने किस तरीके से लागू किया। उन्होंने यह भी कहा है कि दिल्ली, पुदुच्चेरी जैसे केंद्र शासित क्षेत्र वाली विधानसभाओं को भी 15वें वित्त आयोग के दायरे मेंं लाया जाना चाहिए।  इस बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, आंध्र के वित्त मंत्री यानामाला रामकृष्णुडु, पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया मौजूद रहे। कर्नाटक भी इस बैठक  का हिस्सा रहा, जहां चुनाव होने वाले हैं, हालांकि चुनाव प्रचार की व्यस्तता के चलते राज्य से किसी ने हिस्सा नहीं लिया। 
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