ईरान पर प्रतिबंध से भारत पर असर

प्रवीण स्वामी | नई दिल्ली May 10, 2018 11:14 AM IST

ईरान में भारत का निवेश होगा प्रभावित
फरजाद बी में ओएनजीसी विदेश का निवेश
चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है भारत
अफगानिस्तान तक रेल मार्ग की योजना

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाने के फैसले का भारत पर व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक का कहना है कि भारत को ईरान से तेल का आयात कम करने के लिए 6 महीने का समय मिलेगा। इन प्रतिबंधों के कारण भारत को अपने तेलशोधक संयंत्रों को वैकल्पिक कच्चे तेल के शोधन के लिए तैयार करना होगा। साथ ही भारत के रणनीतिक निवेशों पर भी प्रभाव पड़ सकता है जिसे वह क्षेत्रीय हितों के लिए अहम मानता है।  

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। यह भारत के लिए गंभीर चिंता की बात है क्योंकि अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान को एक बार फिर उस क्षेत्र में अपने परमाणु जाल को फैलाने का मौका मिल सकता है।

वॉशिंगटन में विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में पत्रकारों को बताया कि ऊर्जा क्षेत्र और बैंकिंग, निर्यात और ऊर्जा के परिवहन से जुड़े प्रतिबंधों के मामले में 6 महीने की मोहलत दी गई है जबकि दूसरे प्रतिबंधों के मामले में यह 90 दिन है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान में भारत के कई अहम निवेश प्रभावित होंगे। इनमें फारस की खाड़ी में फरजाद बी तेल क्षेत्र में ओएनजीसी विदेश का निवेश शामिल है। इस पर भारत और ईरान ने लंबे समय से आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए पिछले महीने सहमति जताई थी। नए समझौते के तहत इस तेल क्षेत्र से निकलने वाली गैस की खरीद और विपणन की जिम्मेदारी ईरान की होगी जबकि भारतीय कंपनी इसका विकास करेगी। इस पर 4 से 6 अरब डॉलर का निवेश होना अनुमानित है।

प्रतिबंधों के कारण 50 करोड़ डॉलर से चाबहार बंदरगाह के विकास और इसे रेलमार्ग से अफगानिस्तान और मध्य एशिया को जोडऩे की योजना भी प्रभावित हो सकती है। इन नए व्यापारिक गलियारों पर भारत ने करीब 20 अरब डॉलर निवेश की योजना बनाई है।

ईरान पर फरजाद बी तेल क्षेत्र के लिए बातचीत के वास्ते दबाव बनाने के लिए भारत ने पिछले साल वहां से कच्चे तेल के आयात में करीब एक चौथाई की कटौती की थी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक अब इस सौदे पर सहमति बनने के बाद 2018-19 में ईरान से कच्चे तेल का आयात 2.5 करोड़ टन से ऊपर पहुंच सकता है।

चीन के बाद भारत ईरान के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है जबकि ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और ईरान का द्विपक्षीय व्यापार 2015-16 में 9.054 अरब डॉलर था। इसमें से भारत का आयात 6.2 अरब रुपये का था जिसमें अधिकांश हिस्सा कच्चे तेल का था।

 

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