अबूधाबी से पहुंच रहा है कच्चा तेल

शाइन जैकब | नई दिल्ली May 11, 2018 09:42 PM IST

भारत के रणनीतिक तेल भंडार के इतिहास में इसका इस्तेमाल पहली बार विदेशी कारोबारी करने वाला है। अबूधाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडनॉक) का पहला क्रूड कैरियर 21 मई को अबू धाबी से मंगलूर बंदरगाह पर पहुंच सकता है। इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संयुक्त अरब अमीरात के तेल मंत्री अहमद अल जबेर, जो एडनॉक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं, शनिवार को 20 लाख बैरल कच्चे तेल से भरे एक बहुत बड़े क्रूड कैरियर को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। समझौते के मुताबिक एडनॉक 40-50 अरब रुपये के कच्चे तेल का भंडारण करेगी, जो फरवरी की कीमतों के आधार पर होगा जब इसके लिए समझौता हुआ था। 
 
फरवरी महीने में एडनॉक ने भारत के साथ मंगलूर रणनीतिक तेल भंडार में 7.5 लाख टन भंडारण के लिए समझौता किया था।  इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'अबू धाबी तेल टर्मिनल से पहली खेप भारत में 21 मई को मंगलोर बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि दो और खेप मॉनसून के बाद आएंगी।' अन्य वैश्विक दिग्गज जैसे कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (केपीसी) ने भी देश के  रणनीतिक भंडारण में निवेश को लेकर दिलचस्पी दिखाई है।  उन्होंने कहा, 'भंडार के दो कंपार्टमेंट एडनॉक भरेगी और तेल विपणन कंपनियां दूसरे कंपार्टमेंट का इस्तेमाल करेंगी।' भारत के पास 3 भूमिगत चट्टानी खोह विशाखापत्तनम, मंगलूर और पदुर में हैं, जिनकी क्षमता क्रमश: 13.3 लाख टन, 15 लाख टन और 25 लाख टन है। 
 
रणनीतिक भंडार की अवधारणा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार चढ़ाव को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इस समय भारत का कुल तेल भंडारण 66 दिनों के लिए है, जबकि रणनीतिक भंडार और 10 दिन के लिए भंडारण करेंगे। बहरहाल रणनीतिक भंडार के दूसरे चरण की योजना ओडिशा के चांदीखोल और पदुर के विस्तार के माध्यम से बनाई जा रही है।  उन्होंने कहा, 'केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी देगा।' यह परियोजना इंडियन स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष उद्देश्य इकाई के माध्यम से लागू की जा रही है। आईएसपीआरएल ने पहले ही निजी क्षेत्र के कारोबारियों और वैश्विक दिग्गजों को हिस्सेदारी के लिए बातचीत कर रही है। 
 
इस समय भारत की कुल तेल शोधन क्षमता 24.76 करोड़ टन है, जो 2025 तक बढ़कर 41.435 करोड़ टन होने की संभावना है। लेकिन  भारत विश्व का तीसरा बड़ा उपभोक्ता देश है, जहां ऊर्जा की 80 प्रतिशत जरूरतें आयात के माध्यम से पूरी की जाती हैं।  सौदे के मुताबिक एडनॉक द्वारा मंगलूर में किए गए भंडारण पर भारत का 65 प्रतिशत अधिकार होगा और विदेशी कंपनी को शेष 35 प्रतिशत का इस्तेमाल वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए करने की अनुमति होगी। इस सौदे को फरवरी में अंतिम रूप दिया गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अबू धाबी गए थे। यात्रा के दौरान ओएनजीसी विदेश के नेतृत्व में भारतीय कंपनियों के कंसोर्टियम ने 60 करोड़ डॉलर के हिस्सेदारी शुल्क के साथ न्यू लोवर जैकुम ऑफशोर कंसेशन मेंं 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ली थी। 
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