कृषि योजनाओं पर नहीं होगा असर

शुभायन चक्रवर्ती और संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली May 11, 2018 09:43 PM IST

अमेरिकी सरकार ने भारत की ओर से किसानों को मिलने वाली सब्सिडी को लेकर एक और शिकायत दर्ज कराई है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में बुधवार को उसने कहा है कि भारत अपनी कृषि सब्सिडी के स्तर को कम करके दिखा रहा है। यह मामला ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कृषि क्षेत्र में उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर उत्पादन लागत का 50 प्रतिशत करने की योजना बना रही है। दिल्ली ने एक सप्ताह पहले ही डब्ल्यूटीओ में 2015-16 में खाद्य सब्सिडी बिल का ब्योरा दिया है। 
 
भारत के एक उच्च स्तरीय कारोबारी राजनयिक ने कहा कि सब्सिडी को अधिसूचित करने के मामले में अन्य देशों की स्थिति कहीं और खराब है। उन्होंने कहा, 'हमें नहीं पता कि अमेरिका को कहां से आंकड़े मिले हैं। ब्यूनस ऑयर्स में हुए पिछले मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में कृषि सुधार को लेकर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया था जिसकी वजह से कृषि या अगले दो साल की कार्ययोजना को लेकर गतिरोध हो गया और उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला।' कृषि मूल्य एवं लागत आयोग के पूर्व प्रमुख अशोक गुलाटी ने कहा कि अमेरिकी आपत्ति का कोई मतलब नहीं है क्योंकि 1986-88 के रुपये के हिसाब से संदर्भ मूल्यों की गणना की गई है। भारत ने डॉलर के हिसाब से अपनी प्रविष्टि कराई है, जो मानक होना चाहिए। उन्होंने इस बात से भी असहमति जताई कि अमेरिका के इस कदम का असर चुनाव के पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के वादे को पूरा करने की सरकार की योजना पर कोई असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत संबंधित सीमा को पार नहीं कर रहा है। गुलाटी ने कहा, 'बाहरी संदर्भ मूल्य की गणना का डब्ल्यूटीओ का तरीका भी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के मुताबिक बदलना चाहिए।'
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