काजू प्रसंस्करण में आपूर्ति की किल्लत

गिरीश बाबू | चेन्नई May 20, 2018 09:44 PM IST

भारत के काजू उद्योग को घरेलू उत्पादन वर्ष 2025 तक बढ़ाकर 20 लाख टन से अधिक करना होगा। इसकी वजह यह है कि भारत जिन अफ्रीकी देशों से कच्चे काजू का आयात करता है, वे खुद घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत की काजू प्रसंस्करण क्षमता 25 लाख टन है, लेकिन वह इस समय इस क्षमता का एक तिहाई यानी 7 से 8 लाख टन का ही प्रसंस्करण करता है और अन्य देशों से लगभग इतनी ही मात्रा में कच्चे काजू का आयात करता है।  अब धीरे-धीरे आयात घटता जा रहा है, जिससे काजू प्रसंस्करणकर्ताओं को आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय काजू निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसीआई) का कहना है, 'भारतीय प्रसंस्करण अफ्रीकी देेशों से कच्चे काजू के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। अब अफ्रीकी देश काजू के घरेलू प्रसंस्करण को प्रोत्साहन दे रहे हैं और उन्होंने वर्ष 2025 तक अपने कच्चे काजू के 50 फीसदी उत्पादन के घरेलू प्रसंस्करण की योजना बनाई है। ऐसे में भारत के घरेलू उत्पादन को 2025 तक बढ़ाकर 20 लाख टन करना होगा।'

 
सीईपीसीआई ने तीन चरणों में लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र सरकार को एक खाका सौंपा है। इसमें फसल के उचित कटाई-पूर्व प्रबंधन को अपनाने का तात्कालिक समाधान शामिल है। यह काम घरेलू उत्पादन 15 फीसदी बढ़ाने के लिए उचित खाद एवं सिंचाई के जरिये किया जाएगा। सीईपीसीआई के मुताबिक इसके अलावा अगले तीन वर्षों में वर्तमान रकबे 10 लाख हेक्टेयर में 25 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। देश में उत्पादन बढ़ाने का दूसरा तरीका यह है कि हर साल 20 फीसदी पुराने पेड़ों की जगह नए पेड़ रोपे जाएं। 
 
सीईपीसीआई द्वारा सौंपी गई मिशन योजना के मुताबिक योजना के तहत अनुमानित उत्पादकता के आधार पर भारत में वर्ष 2025 तक 21.4 लाख टन कच्चे काजू के उत्पादन का लक्ष्य हासिल हो जाएगा, जबकि उस समय तक अनुमानित मांग 21.9 लाख टन होगी। इसके लिए परंपरागत और गैर-परंपरागत राज्यों में खेती की जरूरत होगी। इसमें कोको और काजू विकास निदेशालय की मंजूरी, राज्य बागवानी विभाग के सहयोग और भारतीय काजू निर्यात संवर्धन परिषद की भागीदारी की जरूरत होगी। 
 
केरल स्थित काजूू प्रसंस्करणकर्ता एवं निर्यातक संघ के सचिव आई निजामुद्दीन ने कहा कि भारत की प्रसंस्करण क्षमता करीब 25 लाख टन है, जबकि सालाना उत्पादन करीब 6 से 7 लाख टन होता है। इससे शेष मांग आयात से पूरी होती है। सीईपीसीआई के आंकड़े दर्शाते हैं कि कच्चे काजू के कुल वैश्विक उत्पादन में भारत का हिस्सा करीब 25 फीसदी है। वर्ष 2016-17 क दौरान भारत में कच्चे काजू का अनुमानित उत्पादन 7,80,000 टन रहा। भारत के 17 राज्यों में 10.4 लाख हेक्टेयर में काजू की खेती होती है। भारत विश्व में सबसे बड़ा काजू प्रसंस्करणकर्ता है, जहां हर साल करीब 16 लाख टन कच्चे काजू का प्रसंस्करण होता है। 
 
सीईपीसीआई ने मार्च, 2018 में अपनी मिशन योजना में कहा है कि देश में इस समय कच्चे काजू की प्रसंस्करण क्षमता केवल 60 फीसदी है क्योंकि घरेलू उत्पादन और आयात के बावजूद कच्चे काजू की आपूर्ति करीब 15 लाख टन है।  अपनी कम प्रसंस्करण लागत के कारण भारत के प्रतिस्पर्धी भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मात दे सकते हैं। सीईपीसीआई ने कहा कि भारत में उद्योग को चलाने के लिए देश के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देेशों की कीमतों पर कच्चे काजू खरीदने पड़ते हैं, जिससे निर्यात में भारी नुकसान होता है। कच्चे काजू का उत्पादन 2016-17 में 16 फीसदी बढ़कर 7,79,335 टन रहा, जो उससे पिछले साल 6,70,300 टन था। इसी वर्ष में कच्चे काजू का आयात 20 फीसदी घटकर 7,70,446 टन रहा, जो उससे पिछले साल 9,58,339 टन था। 
कीवर्ड Cashew, export, import,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक