राइट्स में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

शाइन जैकब | नई दिल्ली May 22, 2018 12:30 PM IST

सरकार रेलवे की सहायक इकाई राइट्स में एक महीने के भीतर कम से कम 12.72 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करने पर विचार कर रही है।  इस मामले से नजदीकी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राइट्स को सूचीबद्ध कर 4 से 4.5 अरब रुपये जुटाने की योजना है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'मूल्य का निर्धारण विनिवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) एक सप्ताह के भीतर कर सकता है। बिक्री के लिए प्रस्तावित 12.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से 0.72 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए होगा।'

बहरहाल रेलवे की एक और इकाई आईआरएफसी की सूचीबद्धता में अभी और देरी हो सकती है क्योंकि विलंबित कर देनदारी में छूट को लेकर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। फरवरी में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने आईआरएफसी को 63.92 अरब रुपये संचयी विलंबित कर देनदारी से छूट दी थी, माना जा रहा था कि इसे कंपनी की सकल पूंजी में जोड़ा जाएगा।

आईआरएफसी को विलंबित कर देनदारी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इसका मूल्यह्रïास, मुनाफे से ज्यादा था। कंपनी ने सामान्य आकलन के मुताबिक कर का भुगतान नहीं किया और यह 21 प्रतिशत न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के तहत था। इसके अलावा यह प्रावधान बनाया गया कि विलंबित कर देनदारी 35 प्रतिशत होगी। इस तरह से कंपनी के बही खाते पर 56 प्रतिशत कर का प्रावधान आ गया।

छूट के बाद यह घटकर 21 प्रतिशत आने की संभावना है, जिससे मुनाफे के बाद कर (पीएसी) में उल्लेखनीय लाभ होगा। उन्होंने कहा, 'इस मामले मेंं स्पष्टता की कुछ कमी है, जिसकी वजह से आईआरएफसी की हिस्सेदारी बिक्री में देरी हो सकती है।' सरकार ने केंद्रीय बजट पेश करते समय 2081-19 में 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा था।

दिलचस्प है कि 2017-18 में कुल विनिवेश प्रक्रिया 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की थी, जो लक्ष्य से ज्यादा है। दीपम ने पहले ही आरवीएनएल के 25 प्रतिशत तक विनिवेश के लिए विज्ञापन एजेंसी हेतु बोली आमंत्रित की है। वहींं दूसरी ओर राइट्स, जिसने 2016-17 मेंं 15.09 अरब रुपये का कारोबार किया, भारत के लिए रणनीतिक तौर पर महत्त्वपूर्ण है। इसका कारोबार इस समय विश्व के 55 देशों में है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र निदेशकोंं की कमी का मसला राइट्स द्वारा पहले ही सुलझाया जा चुका है।

रेलवे की सहायक इकाइयों में जिन इकाइयोंं की हिस्सेदारी की बिक्री का अनुमान था, उनमें आईआरएफसी अहम है। पिछले साल मार्च के अंतिम तक इसके पास 1.52 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जिसमें 8,998 लोकोमोटिव, 47,825 पैसेंजर कोच और 2,14,456 वैगन का वित्तपोषण शामिल है। इसने अन्य रेलवे इकाइयों (रेल विकास निगम लिमिटेड और रेलटेल कॉर्पोरेशन) को 36.12 अरब रुपये मुहैया कराया है और क्षमता बढ़ाने का काम करीब 20.78 अरब रुपये है।  आईआरसीटीसी की सूचीबद्धता भी रोकी गई है क्योंकि केंद्र सरकार ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर सेवा शुल्क माफ कर रखा है। यह पिछले साल 23 नवंबर को किया गया था, जिससे नोटबंदी के दौरान लेनदेन हो सके। सेवा शुल्क माफ किए जाने वर आईआरसीटीसी को एक साल में 500 करोड़ रुपये की चपत लगेगी।

आईपीओ लाने के लिए रेल विकास निगम को सेबी की मंजूरी

सरकारी कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। बाजार नियामक के मुताबिक आरवीएनएल ने सेबी के पास 28 मार्च को अपने आईपीओ दस्तावेज का मसौदा (डीआरएचपी) जमा कराया था उसे 17 मई को उस पर 'टिप्पणी' मिली थी। मसौदा की विषय वस्तु को देखने पर पता चलता है कि तीव्र गति की पटरी के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने वाली कंपनी आरवीएनएल के आईपीओ के जरिये सरकार द्वारा 2.08 करोड़ इक्विटी शेयरों या 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी की बिक्री की जाएगी। येस सेक्युरिटीज, इलारा कैपिटल (इंडिया) और आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्ïस ऐंड सेक्युरिटीज सार्वजनिक मामले का प्रबंधन कर रहे हैं। कंपनी के इक्विटी शेयरों को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्घ किया जाना प्रस्तावित है।

 

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