तेल ने बिगाड़ा खेल, घट सकता है शुल्क

शाइन जैकब और अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली May 22, 2018 09:40 PM IST

केंद्र लगाता है पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: 19.48 रुपये और 15.33 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क
शुल्क में प्रति लीटर 1 रुपये कटौती से 130 अरब रुपये राजस्व का होगा नुकसान

पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार पर कीमतें घटाने का दबाव काफी बढ़ गया है। कीमतें बढऩे से मचे हाहाकार के बीच इन पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क कम किए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि शुल्क में कटौती का फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ही करेगा। शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि पेट्रोल एवं डीजल के दाम में 2 से 4 रुपये तक की कटौती की सकती है।

दिल्ली में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें क्रमश: 76.87 रुपये और 68.08 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। इसी तरह मुंबई में इनके दाम क्रमश: 84.70 रुपये और 72.48 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। यह पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों का अब तक का उच्चतम स्तर है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आई उछाल के बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हालात का जायजा लेने के लिए बुधवार को तेल विपणन कंपनियों के साथ बैठक कर सकते हैं।

ऐसी भी चर्चा है कि सरकार फौरी तौर पर इन तेल कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी से फिलहाल परहेज करने को कह सकती है। इस बारे में वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'पीएमओ को तेल विपणन कंपनियों से आंकड़े एवं अन्य जानकारियां भेजी गई हैं। अब लगभग यह तय हो गया है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले शुल्क में कटौती होगी।'

दिलचस्प बात है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल कीमतें कम थीं तो उस समय सरकार ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच उत्पाद शुल्क में 9 बार बढ़ोतरी की थी। इसके उलट तेल कीमतें बढऩे के बाद सरकार ने पिछले साल अक्टूबर से इसने उत्पाद शुल्क में मात्र एक बार कटौती की है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मोटे तौर पर पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 1 रुपये कटौती करने से सरकार को 130-140 अरब रुपये नुकसान होता है।

एक अधिकारी ने कहा, 'शुल्क में प्रति लीटर 2 रुपये कटौती से 260 से 280 अरब रुपये का अनुमानित नुकसान होगा। शुल्क अगर 4 रुपये प्रति लीटर घटाया गया तो नुकसान बढ़कर 520-560 अरब रुपये हो सकता है।' केंद्र ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पादन शुल्क से 2.43 लाख करेाड़ रुपये राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य रखा है। उत्पाद शुल्क घटाने से सरकारी खजाने पर सीधा असर पड़ेगा, जो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पहले ही बेहाल हो चुका है।

तेल के दाम से राहत दिलाने का सरकार के पास एक दूसरा विकल्प भी है, जिसके तहत यह राज्यों को पेट्रोल एवं डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लोन के लिए मना सकती है। इस संबंध में फैसला जीएसटी परिषद लेगी। इंडियन ऑयल कॉर्पोेरेशन के चेयरमैप संजीव सिंह ने कहा, 'पिछले 15 दिनों से औसत आधार पर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों पर नजर रख रहे हैं। हमारा मानना है कि सभी पेट्रोलियम उतपादन जीएसटी के दायरे में आना चाहिए।'  

अगर कीमतें 60 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो इस वित्त वर्ष के लिए तेल सब्सिडी 250 अरब रुपये के बजटीय प्रावधान को पार कर सकती है। आज भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 77.04 डॉलर रही। दूसरी तरफ ब्रेंट क्रूड की कीमत आज एक समय 79.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अगर उत्पाद शुल्क में कटौती होती है तो केंद्र राज्यों को मूल्य वद्र्घित कर वैट में कटौती के लिए कह सकता है ताकि कीमतों में और कमी लाई जा सके। 

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