रक्षा और भू-राजनीति पर भारत की रूस से बात

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली May 22, 2018 09:51 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच 'अनौपचारिक शिखर वार्ता' में रक्षा और भूराजनैतिक मसले अहम रहे। खासकर ऐसे समय पर इन विषयोंं पर चर्चा हुई है जब अमेरिका द्वारा रूस की सेना पर प्रतिबंध और भारत के साथ अमेरिका की कारोबारी जंग को लेकर संबंध बिगड़े हैं।  सोमवार को मोदी एक दिन की रूस यात्रा पर सोची पहुंचे और मंगलवार सुबह पुतिन उन्हें विदा करने आए। इस यात्रा का आधिकारिक रूप से कोई एजेंडा नहीं तय किया गया था, जिसका मतलब यह है कि प्रधानमंत्री की बातचीत का विषय घोषित नहीं किया गया। साथ ही यात्रा समाप्त होने के बाद दोनों देशों के नेताओं की ओर से कोई संयुक्त बयान भी जारी नहीं किया गया। 
 
इसके बदले दोनों नेताओं की ब्लैक सी रिसॉर्ट टाउन और नौका पर बैठक की फोटो जारी हुई। लेकिन रूस से मिली खबरों से यह पुष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय भूराजनैतिक मसलों और भारत के साथ रूस के रक्षा संबंधों पर दोनों नेताओं ने सबसे ज्यादा चर्चा की। मोदी और पुतिन कई बार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मिल चुके हैं और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर चर्चाएं की हैं। विदेश नीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले अपने कार्यकाल के आखिरी साल में प्रधानमंत्री रूस गए क्योंकि वह मॉस्को से अपने संबंध मजबूत करने को इच्छुक थे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपने समझौतों में संतुलन बनाने की कवायद कर रहा है। 
 
अमेरिकी कांग्रेस के मुताबिक पिछले साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने प्रतिबंध अधिनियम के तहत अमेरिका के प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला (सीएएटीएसए) के लिए समझौता किया था, जिससे कि यूरोप में रूस के प्रभाव को कम किया जा सके और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रण में रखने व उत्तर कोरिया पर अंकुश लगाने पर काम किया जा सके।  रूस के एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा, 'भारत के लिए यह प्रावधान है कि अगर कोई देश रूप से साथ रक्षा और खुफिया क्षेत्रों में अहम कारोबार करता है तो वह उस देश पर आर्थिक व वित्तीय प्रतिबंध लगा सकता है।' 
 
पुतिन ने कहा, 'हमारे रक्षा मंत्रालय बहुत नजदीकी और तालमेल बिठाकर काम करते हैं। हमारी साझेदारी बहुत उच्च रणनीतिक स्तर पर है।'   भारत का रूस के साथ द्विपक्षीय कारोबार 2017-18 के पहले 11 महीने में बढ़कर 9.53 अरब डॉलर हो गया है, जो 2016-17 में 7.48 अरब डॉलर था। पिछले 2 साल मेंं जहां कारोबार बढ़ा है, वहीं यह रूस के पक्ष में रहा है। रूस से 7.62 अरब डॉलर का आयात हुआ है, जिसमें हीरे- प्रसंस्कृत या कच्च्चा, रिफाइंड पेट्रोलियम ऑयल की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है। 
 
भारत द्वारा विकसित किए जाने वाले बहुराष्ट्रीय कारोबारी मार्ग, जिसके माध्यम से रूस, मध्य एशिया और अफगानिस्तान से कारोबार होगा, पर भी चर्चा होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) का मुख्य केंद्र दक्षिण ईरान का चाबहार बंदरगाह है, जिसके माध्यम से तमाम जगहों पर कारोबार हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय मार्ग को सरल बनाया जा सकता है। मोदी ने इस साल के आखिर में भारत में होने वाले 19वें सालाना सम्मेलन के लिए भी पुतिन को आमंत्रित किया। आखिरी द्विपक्षीय सम्मेलन जून 2017 में सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ था, जहां मोदी ने और ज्यादा रूसी निवेश की वकालत की थी। 
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