नकदी की मांग 7 प्रतिशत बढ़ी

अद्वैत राव पालेपू | मुंबई May 23, 2018 10:12 PM IST

अगर नोटबंदी के पहले के स्तर से तुलना करें तो लोगों की नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है, भले ही डिजिटल लेन देन बढऩे के साथ नवंबर 2016 के बाद बैंकों में जमा बढ़ा है।  भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक लोगों के हाथ में मुद्रा (सीडब्ल्यूपी) या लोगों की नकदी या मुद्रा की मांग अप्रैल के अंत में 18.25 लाख करोड़ रुपये रही, जो नवंबर 2016 के 17 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले 4 साल से ज्यादा समय से सरकार जनधन योजना और नोटबंदी जैसे महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं, जिससे बैंकिंग सेवा में उल्लेधनीय बढ़ोतरी हुई है। 
 
इस समय करीब 80 प्रतिशत भारतीयों के बैंक खाते हैं, क्योंकि औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच में सुधार हुई है।  2014 के बाद से खातों की संख्या में 79 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है जबकि  सर्वे में पाया गया है कि करीब 38 प्रतिशत बैंक खाते निष्क्रिय हैं। इसी तरह से जनधन योजना 2014 में पेश की गई, जिसके अंतर्गत 31 करोड़ खाते खोले गए और 9 मई तक करीब 812 अरब रुपये जमा हुए हैं।  मई 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक वाणिज्यिक बैंकों में कुल जमा नवंबर 2016 के 21.8 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 24 प्रतिशत बढ़कर 27.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी समयावधि के दौरान बैंकों ने 97 लाख क्रेडिट कार्ड  और 13 करोड़ डेबिट कार्ड जारी किए हैं और मई 2018 तक क्रेडिट कार्डों की कुल संख्या 3.75 करोड़ और डेबिट कार्ड की संख्या 86.1 करोड़ हो गई है। 
 
मौद्रिक व्यवस्था में नकदी का मापन करने वाला एम-3 मई 2018 में 13 प्रतिशत बढ़कर 140.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो नोटबंदी के पहले 124 लाख करोड़ रुपये था। एम-2 में सीडब्लयूपी का मूल्य, मौजूदा और सावधि जमा के साथ संस्थागत मुद्रा बाजार कोष व अन्य नकदी संपत्ति जिसमें डाकघर जमा भी है, शामिल है। 
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