तेल की बढ़त लाभांश पर लगाएगी चपत

कृष्ण कांत | मुंबई May 24, 2018 09:39 PM IST

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये और देश के चालू खाते के घाटे के लिहाज से ही खराब नहीं हैं, सरकार के लिए ये नई मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से सरकार को मिलने वाला लाभांश भी इसकी तपिश में सूख सकता है क्योंकि सार्वजनिक तेल कंपनियों से उसे मिलने वाला लाभांश बहुत घट सकता है।

वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों से जो लाभांश मिला था, उसमें 46 फीसदी योगदान तो ऊर्जा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और गेल (इंडिया) ने ही किया था। पिछले दस साल में यह सबसे बड़ा आंकड़ा था और वित्त वर्ष 2015-16 के मुकाबले करीब 25 फीसदी अधिक था।

अहम बात यह थी कि सरकारी तेल कंपनियों ने बैंकों और विनिर्माण कंपनियों जैसे भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स, कोल इंडिया, सेल और एनएमडीसी आदि के खराब वित्तीय प्रदर्शन और कम लाभांश भुगतान की चोट भी खजाने पर पडऩे नहीं दी। पेट्रोल और डीजल की ऊंची खुदरा कीमतों पर लगाम कसने के लिए अगर कच्चे तेल पर उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क घटाया गया तो सरकार के कर संग्रह में कमी आ सकती है।

वित्त वर्ष 2017 में केंद्र को पेट्रोलियम पदार्थों पर करों से 2.67 लाख करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था। सरकार को सभी अप्रत्यक्ष कर से प्राप्त राजस्व में इसकी हिस्सेदारी 47.5 फीसदी रही। कुल कर राजस्व में इसका 22 फीसदी योगदान था। हाल में पेट्रोल एवं डीजल कीमतें चढऩे के बाद सरकारी तेल कंपनियों के लिए कीमतों में अतिरिक्त बढ़ोतरी करना पाना मुमकिन नहीं होगा, जिससे इनका मुनाफा प्रभावित हो सकता है। इसकी सीधा असर केंद्र सरकार को इन कंपनियों से मिलने वाले लाभांश पर पड़ेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि इसका सर्वाधिक असर चालू वित्त वर्ष में ही महसूस किया जाएगा। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'तेल कीमतों में ज्यादातर बढ़ोतरी पिछले दो महीने में हुई है और इसका तेल कंपनियों के वित्त वर्ष 2019 के नतीजे पर पड़ेगा। वित्त वर्ष 2018 के लिए तो अच्छा लाभांश मिलने की संभावना है।'

वित्त वर्ष 2017 में गैर ऊर्जा सरकारी उपक्रमों से मिलने वाला लाभांश 12.7 फीसदी कम रहा था, जबकि इसी अवधि के दौरान ऊजा कंपनियों से मिलने वाले लाभांश में 120 फीसदी इजाफा हुआ था। कुल मिलाकर सभी सरकारी तेल उपक्रमों ने वित्त वर्ष 257.4 अरब रुपये का लाभांश दिया था, जो एक साल पहले के 117 अरब रुपये के मुकाबले अधिक रहा। इसके उलट गैर-तेल सरकारी कंपनियों से लाभांश कम होकर 304.2 अरब रुपये रह गया, जो एक साल पहले 348.3 अरब रुपये रहा था। 

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