सरकार को नहीं मिल रहे एयर इंडिया के खरीदार

अरिंदम मजूमदार | नई दिल्ली May 27, 2018 10:55 PM IST

केंद्र सरकार  एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया को तेज करने की कवायद कर रही है, लेकिन अभी इसमें खरीदार रुचि नहीं ले रहे हैं। सलाहकार फर्म ईवाई के एक वरिष्ठ अधिकारी पिछले 3 सप्ताह से दुनिया भर में खरीदार तलाश रहे हैं, जिन्होंने यूरोप और एशिया की विमानन कंपनियों के प्रमुखोंं से बैठकें की हैं। इस पूरी विनिवेश प्रक्रिया में ईवाई लेन देन संबंधी सलाहकार है और पूरी बिक्री प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने और सरकार को सलाह देने का दायित्व इस कंपनी पर है। 

इसके बावजूद सरकार को अभी भी इस एयरलाइंस में दिलचस्पी लेने वाले किसी एक औपचारिक रुचि पत्र पाने का इंतजार है। रुचि पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई है। शुरुआत में रुचि पत्र के लिए अंतिम तिथि 14 मई रखी गई थी, जिसे पहले ही बढ़ाया जा चुका है।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने 28 जून की बैठक में एयर इंडिया और उसकी 5 सहायक इकाइयों के  रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। निजीकरण की प्रक्रिया में शामिल एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'इस सौदे के सलाहकारों ने पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रोड शो आयोजित किए हैं, जिससे बिक्री की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा सके और समझाया जा सके कि विक्रेता क्या चाहते हैं। उन्होंने सभी वैश्विक एयरलाइंस के अधिकारियों से मुलाकात की है।'

रोड शो का आयोजन ऐसे समय किया जाता है, जब कंपनी सार्वजनिक सूचीबद्धता से धन जुटाने की कवायद करती है या उस इकाई को बेचने के लिए एक उचित खरीदार तलाशने की कवायद होती है। माना जा रहा है कि ईवाई की टीम ने एयर फ्रांस-केएलएम के अधिकारियों से एमस्टर्डम में मुलाकात की है। वे कई बार फ्रैंकफर्ट गए, जहां उन्होंने जर्मन एयरलाइंस लुफ्थांसा के सामने प्रस्तुति दी। अधिकारी ने कहा कि टीम ने सिंगापुर एयललाइंस के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें एक दौर में भारत में हुई वार्ता भी शामिल है।

अधिकारी ने कहा, 'हमें लगता है कि बिक्री के लिए हमने आकर्षक उत्पाद पेश किया है। बहरहाल बोलीकर्ताओं की ओर से सुस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, ऐसे में सरकार संभावित खरीदारों की मांग को समझने की कवायद कर रही है। नियमों के मुताबिक विनिवेश प्रक्रिया के दौरान सरकारी अधिकारी इस तरह की चर्चा में शामिल नहीं हो सकते, इसलिए ईवाई यह काम कर रही है।' 

बहरहाल अधिकारियों ने कहा कि विदेशी विमानन कंपनियों की ओर से कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है और सरकार अभी भी कोई रुचि पत्र (ईओआई) पाने का इंतजार कर रही है। लुफ्थांसा ने शुरुआत में दिलचस्पी दिखाई थी, जिसने इटली की सरकारी विमानन कंपनी अलिटालिया की बोली में रुचि दिखाई, लेकिन इटली की सरकार ने इसे रोक दिया। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'अगर प्राथमिक दिलचस्पी की बात करें तो लुफ्थांसा यूरोप की विमानन कंपनियों में ज्यादा रुचि ले रही है।' 

इसी तरह से एयर फ्रांस केएलएम के भी बोली में शामिल होने की संभावना नहीं है क्योंकि कंपनी पहले से ही श्रमिकों के असंतोष से जूझ रही है और इसकी वजह से एयर फ्रांस के सीईओ ज्यां मार्क जैनेलेक को इस्तीफा देना पड़ा है। माना जा रहा था एयर फ्रांस केएलएम उन विदेशी विमानन कंपनियों में से एक है, जो वाणिज्यिक साझेदार जेट एयरवेज के साथ मिलकर एयर इंडिया के लिए बोली लगा सकती है। उसके बाद से ही जेट एयरवेज आधिकारिक रूप से इस तरह की किसी बात से इनकार कर रही है और बिक्री की शर्तों को अनुकूल नहीं बता रही है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने इसके पहले खबर दी थी कि ब्रिटिश एयरवेज सरकार की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी की शर्त के कारण बोली में रुचि नहीं दिखा रही है। इसके अलावा ईंधन का मूल्य ज्यादा रहने के माहौल की वजह से विमानन उद्योग का जोखिम लेने का जज्बा कम हुआ है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि विस्तारा का नुकसान बढ़ रहा है और एयरलाइंस विमानों का ऑर्डर कर विस्तार के अगले चरण में जाना चाहती है, ऐसे में सिंगापुर एयरलाइंस संभवत: एयर इंडिया की बोली में दिलचस्पी नहीं लेगी।

सरकारी अधिकारी ने कहा कि अब तक एयर इंडिया को लेकर टाटा संस के साथ कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अगर कोई विदेशी एयरलाइंस दिलचस्पी दिखाती भी है तो उसे भारतीय साझेदार ढूंढना होगा। भारतीय कंपनियों द्वारा दिलचस्पी न लेने की वजह से भी विदेशी विमानन कंपनियों को प्रक्रिया में हिस्सा लेना मुश्किल हो रहा है।' 

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