दोहरे कराधान से दूर रहेगा कर विभाग

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली May 27, 2018 11:01 PM IST

अप्रत्यक्ष कर विभाग ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दौर में आयातित सामान के सिलसिले में दोहरे कराधान के मसले का समाधान कर लिया है, जिन्हें निर्धारित गोदामों में रखा जाएगा और बाद में उन्हें मंजूरी दी जाएगी। यह मसला इसके पहले के परिपत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें इस तरह के लेन देन पर दो बार एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) लगाने का मसला उठा था। मान लीजिए कि एक कंपनी सामान का आयात करती है और उसे सीमा शुल्क से जुड़े गोदाम में रखती है। उसे आईजीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा। जब सामान को अंतिम बिक्री के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी तो उस पर भी आईजीएसटी का भुगतान करना होगा। 

देवाशिष पॉलिमर ने यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में उठाया था और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईटीसी) ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि आईजीएसटी उस समय लगाया और एकत्र किया जाएगा, जब गोदाम में रखे सामान पर घरेलू खपत को लेकर अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। तकनीकी हिसाब से देखें तो इसका मतलब यह है कि आईजीएसटी उस समय लगाया जाएगा जब प्रवेश का एक्स बॉन्ड बिल दाखिल किया जाएगा। 

देवाशिष पॉलिमर के आदित्य मोदी ने कहा, 'उम्मीद है कि इससे (परिपत्र) तमाम कारोबारियों को फायदा होगा, जो इस प्रावधान की वजह से कठिनाइयों से जूझ रहे थे।' यह परिपत्र इस साल 1 अप्रैल से प्रभावी होगा।
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