केंद्र बना रहा 200 अरब रुपये का 'महा' सिंचाई पैकेज

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली May 27, 2018 11:02 PM IST

केंद्र सरकार महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों के लिए 200 अरब रुपये के सिंचाई पैकेज पर विचार कर रही है। इसी इलाके में किसानों की आत्महत्या की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती रही हैं। सरकार की ओर से इस पैकेज की घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है। इस धन का इस्तेमाल राज्य की रुकी पड़ी 108 छोटी और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए होगा।  ये परियोजनाएं सूखा प्रभावित इलाकों व अन्य क्षेत्रों में है, जिनका 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अभी परियोजना चल रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य की 7.75 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन सिंचित क्षेत्र में आ जाएगी।  

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस पैकेज के लिए करीब 75 प्रतिशत या 150 अरब रुपये राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के दीर्घावधि सिंचाई कोष से मिलेगा, वहीं शेष 50 अरब रुपये केंद्र सरकार के खजाने से आएगा। 

इस पहल में बढ़कर हिस्सा ले रहे गडकरी ने कहा, 'यह (पैकेज) संकट से जूझ रहे किसानों के लिए होगा, जो सूखे की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट नोट आने की उम्मीद है।'

गडकरी ने कहा कि पैकेज की जरूरत इसलिए है कि पूर्व की कांग्रेस-राकांपा की राज्य सरकार ने 108 सिंचाई परियोजनाएं शुरू की थी, जिसके लिए अभी भी 500 अरब रुपये की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'इन परियोजनाओं के लिए हमें धन की जरूरत है। मुख्यमंत्री (देवेंद्र फडणवीस) ने धन की मांग की थी और हम इसकी व्यवस्था कर रहे हैं।'

नाबार्ड द्वारा 200 अरब रुपये की शुरुआती पूंजी से 2017-18 में दीर्घावधि सिंचाई कोष का गठन किया गया था। बाद में इसे बढ़ाकर 400 अरब रुपये कर दिया गया। 2018-19 के बजट में यह घोषणा की गई थी कि इसमें धन बढ़ाया जाएगा, जिससे परियोजनाओं पर काम किया जा सके। 

महाराष्ट्र में सिंचित क्षेत्र महज 18 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 48 प्रतिशत है। 2014 और 2015 में भारत को लगातार चौथी बार सूखे का सामना करना पड़ा, जो 1900 के बाद 115 साल बाद ऐसा हुआ है। जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से इक्रियर के एक शोध पत्र में कहा गया है कि देश के करीब 68 प्रतिशत इलाके सूखा से प्रभावित रहे, जिसका असर विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग रहा। इनमें से 35 प्रतिशत इलाके ऐसे रहे जहां बारिश 750 से 1125 मिलीमीटर हुई। वहीं 33 प्रतिशत इलाके ऐसे रहे, जहां सालाना बारिश 750 मिलीमीटर से कम रही और यह इलाके बहुत ज्यादा संकटग्रस्त रहे।

इक्रियर की रिपोर्ट मेंं कहा गया है कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में 2014-15 और 2015-16 में बहुत ज्यादा सूखे का सामना करना पड़ा, जहां सामान्य से 33 से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई।  पानी का संकट इतना गंभीर था कि राज्य सरकार को जलदूत एक्सप्रेस नाम से रेल चलानी पड़ी जिसके माध्यम से मराठवाड़ा के लाटूर जिले में 2595 लीटर पानी पहुंचाया गया। राज्य सरकार ने 5.23 करोड़ रुपये खर्च कर पेयजल की कमी पूरा करने की कवायद की। 

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