ओवरलोडिंग नियमों में ढील से ट्रक बिक्री होगी प्रभावित

राम प्रसाद साहू |  May 27, 2018 11:16 PM IST

मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2018 में 20 प्रतिशत की बिक्री वृद्घि दर्ज करने वाले मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहन (एमऐंडएचसीवी) सेगमेंट को ओवरलोडिंग सख्ती कम होने से समस्या का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ओवरलोडिंग प्रतिबंधों में काफी नरमी आई है। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के चिराग जैन और इंदरप्रीत सिंह का मानना है कि प्रतिबंधों में नरमी का असर ट्रकों की खुदरा मांग, उत्पाद मिश्रण (कम टन वाले ट्रकों की मांग बढ़ी है) और डिस्काउंट पर पहले ही दिखना शुरू हो गया है। इस वजह से वित्त वर्ष 2019 के लिए 12-15 प्रतिशत की बिक्री वृद्घि के अनुमान में कमी का जोखिम गहरा गया है। 

यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ओवरलोडिंग प्रतिबंध सड़क और खनन पर इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च में वृद्घि के मुख्य कारणों में से एक है जो एमऐंडएचसीबी (ट्रक) सेक्टर के लिए वृद्घि के लिए जिम्मेदार है।

वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में दो प्रतिशत की गिरावट के बाद इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की दूसरी छमाही में 37 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की। उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत अन्य राज्यों में ओवरलोडिंग प्रतिबंधों की वजह से पिछले साल इस सेक्टर में बिक्री के लिहाज से मजबूती दर्ज की गई थी। जहां उत्तरी राज्यों में बिक्री का योगदान वित्त वर्ष 2017 में 20 फीसदी से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गया, वहीं उत्तर प्रदेश में बिक्री साढ़े तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2018 में 35,000 वाहन हो गई। टाटा मोटर्स के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि उत्तर प्रदेश में बड़े ट्रकों के लिए मांग कुछ महीने पहले की 700-800 वाहन की तुलना में बढ़कर हर महीने 2800-3000 वाहन हो गई है। भारी ट्रकों की बिक्री में पांच-एक्सल वाले ट्रकों का योगदान फिलहाल 60 प्रतिशत का है जो दो साल पहले 10 प्रतिशत था। इस संदर्भ में, ओवरलोडिंग प्रतिबंधों में नरमी से ट्रकों की बिक्री में भारी कमी आएगी। 

एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के अनुसार किसी मंदी का आय पर भारी डिस्काउंट के अलावा बढ़ती ट्रक उत्पादन क्षमता की वजह से भी प्रभाव पडऩे की आशंका है। हालांकि मांग मजबूत रही है, लेकिन वोल्वो आयशर जैसी एमऐंडएचसीबी कंपनियों ने मार्च तिमाही के परिणाम के बाद संकेत दिया है कि डिस्काउंट अधिक बना रहेगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि बड़ी कंपनियां बाजार भागीदारी बढ़ाने की संभावना तलाश रही हैं और यह रुझान वित्त वर्ष 2019 में बरकरार रहने का अनुमान है जिससे इस सेक्टर के लिए प्राप्तियों और मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।

भारत की दूसरी सबसे बड़ी ट्रक निर्माता अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक विनोद दसारी ने कहा कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में ओवरलोडिंग प्रतिबंध पर सख्ती से अमल नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि हालांकि अशोक लीलैंड पर प्रभाव ज्यादा नहीं होगा क्योंकि इससे प्रभावित सेगमेंटों और बाजारों में कंपनी की बहुत ज्यादा उपस्थिति नहीं है। कंपनी का मानना है कि उन बाजारों में यदि ओवरलोडिंग प्रतिबंध में नरमी आती है तो बिक्री पर प्रभाव महज 1-2 प्रतिशत रहेगा।

मांग पर जिन अन्य समस्याओं से प्रभाव पड़ सकता है, उनमें डीजल की बढ़ती कीमतें और मालभाड़ा दरें हैं। हालांकि मालभाड़ा दर दिसंबर से ही बढ़ रही है लेकिन वह डीजल लागत में वृद्घि के अनुपात में काफी नीचे है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का मानना है कि डीजल कीमतें दिसंबर 2017 से 13 प्रतिशत बढ़ी हैं, वहीं मालभाड़ा दरें इससे आधी बढ़ी हैं। एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत को देखते हुए मालभाड़ा दर पर निगरानी रखे जाने की जरूरत होगी। विश्लेषकों का कहना है कि इसके अलावा बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें से अप्रत्यक्ष प्रभाव को देखते हुए वित्त की उपलब्धता और ट्रकों की रीसेल वैल्यू से भी कुछ समस्या पैदा हो सकती है। 

अब तक बिक्री में सुस्ती के संकेत नहीं मिले हैं। अप्रैल में एमऐंडएचसीवी की बिक्री बीएस-4 मानाकों के प्रभावी होने से पहले की खरीदारी को देखते हुए काफी कम आधार की वजह से मजबूती से बढ़ी है। हालांकि अब इसमें बदलाव देखा जा सकता है और मई-जून के लिए बिक्री वृद्घि के आंकड़े इसके लिए स्पष्टï संकेत मुहैया कराएंगे। कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो, नए लॉन्च, रक्षा, निर्यात पर खास ध्यान दिए जाने आदि की वजह से अब कई ब्रोकर अशोक लीलैंड पर सकारात्मक दिख रहे हैं। 

हालांकि बिक्री के संदर्भ में प्रभाव टाटा मोटर्स और वोल्वो आयशर जैसी अन्य सूचीबद्घ कंपनियों पर अधिक देखा जा सकता है। हालांकि टाटा मोटर्स और आयशर के लिए ज्यादातर मुनाफा मौजूदा समय में जेएलआर और रॉयल एनफील्ड से प्राप्त होता है, लेकिन फिलहाल कुछ दबाव दिख रहा है। उदाहरण के लिए जेएलआर ने हाल में अपने मुनाफे पर दबाव दर्ज किया है। वहीं टाटा मोटर्स के ट्रक व्यवसाय पर किसी तरह के प्रभाव की भरपाई उसके भारतीय व्यवसाय (यात्री वाहन शामिल) में दर्ज किए जा रहे सुधार से होगी। 

कुल मिलाकर, मांग में किसी तरह की गिरावट का ट्रक व्यवसाय में तेजी की रफ्तार पर प्रभाव दिखेगा और इससे सेक्टर की सभी कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होगा। 

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