कर कटे अधिक तो जारी रखें अपना पीपीएफ

प्रियदर्शिनी माजी |  May 27, 2018 11:22 PM IST

लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता 15 साल के लिए खोला जाता है। इतनी लंबी अवधि तक रकम जमा होने के बाद खाता परिपक्व होने पर आपको जो रकम मिलती है, वह आम तौर पर बहुत अधिक होती है। इसीलिए खाते की अवधि आगे बढ़ानी हो या उसमें से पैसा निकालना हो, दोनों ही सूरतों में अच्छी तरह से सोच-विचार करने के बाद ही कदम आगे बढ़ाने चाहिए।

आपका पीपीएफ खाता तो 15 साल में परिपक्व होता है, लेकिन 15 साल की यह गिनती आपके खाता खुलवाने के साथ ही शुरू नहीं हो जाती। जिस वित्त वर्ष में आप पहली बार पीपीएफ खाते में रकम जमा कराते हैं, उस वित्त वर्ष के अंत से आपके खाते की शुरुआत मानी जाती है। उदाहरण के लिए अगर आपने 24 मई, 2010 को पीपीएफ खाता खुलवाया है तो खाते की शुरुआत 31 मार्च, 2011 मानी जाएगी और इसकी अवधि 1 अप्रैल, 2026 को पूरी होगी।

आइए देखते हैं कि पीपीएफ खाता परिपक्व होने यानी 15 साल पूरे होने पर आपके पास क्या विकल्प होते हैं? पहला विकल्प है खाते की अवधि पांच साल बढ़ा देना। आप कितनी भी बार पांच-पांच साल के लिए अपना खाता बढ़वा सकते हैं। बढ़ी हुई अवधि के दौरान निवेश चाहे तो अंशदान करे यानी निवेश करे और चाहे तो अंशदान के बगैर ही खाता चलाता रहे। लेकिन अगर एक साल तक वह कोई रकम जमा नहीं करता है तो बाकी बची अवधि में उसे रकम लगाने की इजाजत नहीं मिलेगी यानी उसे ब्याज तो मिलेगा, लेकिन अवधि बढ़ाए जाने से पहले जमा कुल रकम पर ही मिलेगा। फायदे की बात यह है कि पीपीएफ खाते से मिलने वाला रिटर्न ऊंचे आयकर के दायरे में आने वाले निवेशकों को ज्यादा माफिक आएगा।

 प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी विशाल धवन की सलाह है कि यदि आपके पास नकदी का प्रवाह अच्छा खासा है तो आपको पीपीएफ खाता परिपक्व होने पर उसकी अवधि और बढ़ा देनी चाहिए क्योंकि उस पर कर के बाद मिलने वाला प्रतिफल काफी अच्छा होता है। ऊंचे आयकर दायरे में आने वाले निवेशकों के लिए तो यह और भी आकर्षक होता है।

 लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मसलन 15 वर्ष की अवधि जैसे ही पूरी हो जाती है और यह तय कर लिया जाता है कि पीपीएफ खाता अभी जारी रखना है तो निवेशक को फॉर्म एच भरना चाहिए और उसे बैंक या डाकघर में जमा कर देना चाहिए। यदि निवेशक इस फॉर्म को नजरअंदाज कर देता है और इसे भरे बगैर ही 15 साल बाद पीपीएफ में रकम डालता रहता है तो उस रकम को नियमित जमा नहीं माना जाएगा और उस पर किसी भी तरह का ब्याज नहीं दिया जाएगा। यदि आप फॉर्म एच भरे बगैर ही पीपीएफ खाते से रकम निकासी करने जाते हैं तो आपको शुरुआती 15 साल के दौरान किए गए निवेश पर ही ब्याज मिलेगा। इतना ही नहीं आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आयकर की जो छूट मिलती है, वह भी 15 साल की अवधि के बाद जमा की गई रकम पर लागू नहीं होगी।

 पीपीएफ खाता खुलवाने के बाद शुरुआती 15 साल की अवधि के दौरान पांच साल पूरे होने पर आंशिक रकम निकासी की जा सकती है। यदि कोई निवेशक पीपीएफ खाते की अवधि बढ़वाता है और उस दौरान निवेश भी जारी रखता है तो पांच साल की विस्तारित अवधि के दौरान साल में एक बार आंशिक निकासी की जा सकती है। लेकिन उसके लिए फॉर्म सी के जरिये आवेदन करना होगा। पांच वर्ष की उस अवधि के दौरान बकाया राशि का 60 फीसदी तक निकाला जा सकता है।

 अगर कोई निवेशक पीपीएफ खाते को पांच साल के लिए बढ़ाता है, लेकिन उस दौरान उसमें कोई भी रकम जमा नहीं करता तो वह कितनी भी रकम उसमें से निकाल सकता है। बाकी बची रकम पर ब्याज पहले की तरह मिलता रहेगा। पीपीएफ खाते को बंद भी किया जा सकता है, लेकिन 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद ही इसकी इजाजत मिलती है।

 जब 15 साल पूरे हो जाते हैं तो पीपीएफ खाते से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में मिया जा सकता है। निवेशक को अपनी उम्र और आर्थिक स्थिति के हिसाब से इस बारे में फैसला करना चाहिए। पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन केसंस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'अगर आपकी सेवानिवृत्ति में अभी 5-10 साल बचे हैं और आपके ऊपर शिक्षा या आवास ऋण बकाया है तो बेहतर यही है कि पीपीएफ पूरा होने पर मिली रकम का इस्तेमाल उन्हें चुकाने में कर दिया जाए।' निवेशक अपनी आर्थिक स्थिति के आधार पर पीपीएफ से मिली रकम का इस्तेमाल कई तरीकों से कर सकता है। वह अधिक प्रतिफल देने वाली संपत्तियों मसलन शेयरों में भी उसे लगा सकता है।

राइट होराइजन के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अनिल रेगो कहते हैं कि कई निवेशक पीपीएफ खाता परिपक्व होने के बाद उससे मिली रकम को सेवानिवृत्ति के बाद इस्तेमाल के लिए भी सहेज लेते हैं। बेहतर यह है कि सबसे पहले चुन लिया जाए कि आपके लिए संपत्ति का किस तरह आवंटन उपयुक्त है। उसके बाद रकम का कुछ हिस्सा इक्विटी म्युचुअल फंडों में लगा दिया जाए। लेकिन अगर किसी के पास निवेश के लिए चार-पांच साल से भी कम समय है तो उसे इक्विटी से परहेज करना चाहिए।

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