हाइब्रिड एन्युटी ने बढ़ाया सड़क क्षेत्र में निजी निवेश

मेघा मनचंदा | नई दिल्ली May 28, 2018 10:25 PM IST

राजमार्ग परियोजनाएं हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर दिए जाने की केंद्र सरकार की कवायदों के बाद सड़कों में निजी क्षेत्र की दिलचस्पी बढ़ी है। रेटिंग एजेंसी मूडीज की  रिपोर्ट के मुताबिक हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के बाद सड़क क्षेत्र में निवेश का नया प्रवाह शुरू हुआ है। 

मूडीज के मुताबिक पीपीपी को सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी इकाई और निजी डेवलपर के बीच बुनियादी ढांचा परिसंपत्ति की डिजाइन, बिल्ट, फाइनैंस, ऑपरेट और/या रखरखाव के लिए खास अवधि के समझौते के रूप में परिभाषित किया गया है। मूडीज के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ विश्लेषक अभिषेक त्यागी ने कहा, 'हाल के वर्षों में राजमार्ग परियोजनाओं में निजी क्षेत्र का निवेश कम हुआ है, जिसकी वजह परियोजना की सुस्त मंजूरी और लागत बढऩा है। लेकिन भारत सरकार ने 2016 में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पेश किया, जिसकी वजह से निवेश का नया प्रवाह बढ़ा है।' 


इसके अलावा बंदरगाह, जहाजरानी और रेल क्षेत्रों में भी पीपीपी ढांचे में सुधार पर विचार हो रहा है, जिससे निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित किया जा सके। भारत ने राजमार्ग के लिए जो मॉडल स्वीकार किया, वह पीपीपी के पुराने मॉडलों की तुलना में सरकारी व निजी क्षेत्र के बीच परियोजना के जोखिम को लेकर संतुलन स्थापित करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके साथ ही सरकार निर्माण के चरण में ही धन मुहैया कराती है, जिससे पहले के मॉडलों की कुछ चिंता दूर हुई है। 

हाइब्रिड एन्युटी परियोजना में सरकार 40 प्रतिशत इक्विटी लगाती है, जबकि शेष वित्तपोषण की व्यवस्था परियोजना का ठेका लेने वाले को करना होता है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि पुराने पीपीपी मॉडलों जैसे बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) और टोल ऐंड बीओटी जैसे मॉडल में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी ठहर गई है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि नए मॉडल से परियोजना के आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। राजमार्गों की लंबाई के हिसाब से देखें तो कुल ठेकों में से 46 प्रतिशत और कुल मूल्य (765 अरब रुपये) के आधार पर 63 प्रतिशत परियोजनाओं का आवंटन पिछले 12 महीनों में मार्च 2018 के आखिर तक एचएएम के आधार पर हुआ है।
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