मॉनसूनी फुहार ने दी दस्तक

संजीव मुखर्जी |  May 29, 2018 10:36 PM IST

पूरे देश के किसानों के लिए जीवनरेखा समझे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने केरल में दस्तक दे दी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार केरल में मॉनसून तय समय से तीन दिन पहले आ गया। मॉनसून का जल्दी आना खरीफ फसलों की बुआई के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन स्थिति काफी हद तक इस पर निर्भर करेगी कि आगे बारिश की रफ्तार कैसी रहती है। 

मौसम विभाग ने एक बयान में कहा है, 'मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों, केरल के शेष हिस्सों, तटीय और दक्षिणी कर्नाटक के कुछ इलाकों, पूर्वी और मध्य तथा बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान मॉनसून आने की संभावना है।' मौसम का अनुमान बताने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगमन की कल घोषणा की थी। 

मौसम विभाग ने 29 मई को मॉनसून आने का अनुमान जताया था। यह भविष्यवाणी 'चार दिन के प्लस माइनस के मॉडल एरर' के साथ की गई थी। मॉनसून की बारिश के जल्द शुरू होने से अक्सर किसानों को चावल, गन्ना, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों की जल्द बुआई में मदद मिलती है, क्योंकि देश में लगभग 50 प्रतिशत कृषि भूमि पर सिंचाई का अभाव है। 

कृषि पैदावार बढ़ाने और आर्थिक वृद्घि के अलावा, औसत बारिश से महंगाई को काबू में बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है जिससे मई 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राहत मिलेगी। 2017 में मॉनसून की बारिश 98 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में लॉन्ग-टर्म एवरेज का 95 प्रतिशत रही। 2016 में औसत बारिश से पहले भारत को एक दशक के समय में चौथी बार कई वर्षों तक सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ा था जिससे किसानों की आय प्रभावित हुई और कुछ किसानों ने आत्महत्या कर ली।

मॉनसून की औसत बारिश से भारत को दुनिया के प्रमुख चावल निर्यातक की अपनी हैसियत को बरकरार रखने में मदद मिलेगी। हालांकि केरल में समय पर मॉनसून आने से इस बात की गारंटी नहीं है कि देश के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून की चाल अनुकूल रहेगी। मौसम विभाग ने 2018 के लिए पिछले महीने जारी मॉनसून के अपने पहले अनुमान में कहा था कि मॉनसून सामान्य रहने की संभावना है, जिससे कृषि क्षेत्र में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। मौसम विभाग ने कहा कि जून से सितंबर की अवधि में बारिश 5 प्रतिशत के प्लस एवं माइनस के मॉडल एरर के साथ दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 97 प्रतिशत पर रहने की संभावना है। 

एलपीए पूरे देश में वर्ष 1951-2000 से औसत बारिश का स्तर है और इसके 89 सेंटीमीटर रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल बारिश के सामान्य रहने की 42 प्रतिशत संभावना है जबकि 30 प्रतिशत संभावना इसके सामान्य से नीचे रहने की है। इससे पहले स्काईमेट ने भी यह कहा था कि 2018 में मॉनसून  'सामान्य' रहने की संभावना है। स्काईमेट का कहना है कि इस साल बारिश 5 प्रतिशत के प्लस माइनस के मॉडल एरर के साथ एलपीए की 100 प्रतिशत रह सकती है। मौसम विभाग मॉनसून की बारिश के बारे में अपना क्षेत्र-वार अनुमान जून में अपने दूसरे अपडेट के साथ जारी करेगा। 

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