जीएसटी रिफंड को लेकर भिड़ंत

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली May 30, 2018 09:09 PM IST

निर्यातकों के शीर्ष निकाय द्वारा 200 अरब रुपये के कर रिफंड के इंतजार के दावे के एक दिन बाद सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। निर्यातकों के मुताबिक यह रिफंड वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत उन्हें मिलना है।  मंगलवार को फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने कहा कि 31 मार्च तक आसानी से रिफंड हुआ। उसके बाद रिफंड में अचानक कमी आ गई। फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा, 'मार्च महीने मे जहां 70 अरब रुपये के दावे का निपटान किया गया, वहीं अप्रैल में यह राशि गिरकर 10 अरब रुपये रह गई।' 

 

वहीं वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि लंबित रिफंड की राशि 140 अरब रुपये थी। मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है, 'मार्च 2018 के बाद रिफंड में आई कमी के बारे में मीडिया रिपोर्ट के विपरीत मई 2018 में 800 अरब रुपये रिफंड मंजूर किया गया।' इसमें कहा गया है कि सरकार ने अब तक 300 रुपये रिफंड के रूप में जारी किए हैं।  फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'यह ध्यान दिए जाने वाली बात है कि 140 अरब रुपये वह राशि है, जिसका दावा दाखिल किया गया है। लेकिन वे उस राशि को नहीं जोड़ रहे हैं, जिसक ा दावा सॉफ्टवेयर में बदलाव के कारण निर्यातक नहीं कर सके हैं।'

 

इसके अलावा सरकार लंबित राशि के भुगतान के लिए गुरुवार और उसके बाद से दूसरा 'रिफंड पखवाड़े का विशेष अभियान' चलाने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस कवायद से हर तरह के रिफंड दावों का निपटान हो सकेगा, जो सीमा शुल्क, केंद्रीय व राज्य जीएसटी से जुड़े हैं और जिनके आवेदन 30.04.2018 को या इसके पहले मिले हैं।  सहाय ने कहा, 'पिछली बार मंजूरी अभियान सफल हुआ था और बड़े पैमाने पर मामले निपटाए गए थे। इस बार फिर विशेष अभियान से यह पता चलता है कि बड़े पैमाने पर रिफंड लंबित है और आम तरीके से यह नहीं हो पा रहा है।' बहरहाल वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने दावा किया कि रिफंड अटकने की एक बड़ी वजह यह है कि कारोबारी सही तरीके से दावा पेश नहीं कर पाए हैं। 

 

साहनी ने कहा, 'पहले रिफंड मासिक आधार पर होता था, लेकिन फरवरी से सरकार ने संचयी गणना शुरू कर दी। अब अगर किसी महीने में त्रुटि आती है तो यह पूरी प्रक्रिया बाधित करने में सक्षम है और परिणाम स्वरूप तमाम रिफंड अटक गए हैं।' कुल लंबित रिफंड में इनपुट टैक्स क्रेडिट करीब 130 अरब रुपये है, जबकि शेष एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) है। निर्यातकों ने कहा कि आईटीसी दावे की प्रक्रिया पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक नहीं है और जिस तरह से गोलमोल का तरीका अपनाया जाता है, उसे लेकर निर्यातक समुदाय में तमाम लतीफे बन गए हैं।  एक निर्यातक सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन दाखिल करता है, उसके बाद उसके बही खाते से इसे घटाया जाता है। उसके बाद वह इस लेन देन का भौतिक प्रिंट लेता है और उसे कर अधिकारियों के समक्ष दाखिल करता है। लेकिन बोझ से दबे कर अधिकारी इसे तत्काल स्वीकार करने में सक्षम नहीं होते। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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