आरबीआई प्रतिबंधों का एक्सचेंजों पर नहीं दिख रहा असर

वीरेश्वर तोमर | नई दिल्ली May 30, 2018 09:45 PM IST

भारतीय क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कारोबारियों में रुचि बढ़ाने के लिए ट्रेडिंग प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन करा रहे हैं
कुछ नए एक्सचेंज कारोबार शुरू करने के लिए तैयार हैं और नीतिगत स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं
अधिकांश एक्सचेंज रुपयों में लेनदेन के साथ ही क्रिप्टो से क्रिप्टो लेनदेन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं

भारत में नीतिगत अस्पष्टता और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले से इतर भारतीय क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज आभासी मुद्राओं में लेनदेन पर कारोबारी प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन करा रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनडेल्टा ने 22 से 29 मई के दौरान एसीटी कॉइन में अधिकतम कारोबार करने वाले 500 कारोबारियोंं को वरीयता के अनुसार पुरस्कार देने की घोषणा की है। इससे पहले एक अन्य क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनेक्स ने 15-22 मई के दौरान आईओएसटी कॉइन में कारोबार करने वाले शीर्ष 1,000 कारोबारियों को कुल 50 लाख रुपये की कीमत के आईओएसटी कॉइन पुरस्कार स्वरूप देने की घोषणा की है। बिटबीएनएस एक्सचेंज भी जेडआईएल कॉइन में इसी तरह की प्रतियोगिता आयोजित करा रहा है।

कॉइनडेल्टा के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी राजदीप सिंह ने बताया कि इस तरह की प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा, 'क्रिप्टो समुदाय ने शुरू से हमारा साथ दिया और कठिन परिस्थितियों में भी हम पर विश्वास बनाए रखा। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से हम उनके साथ और भरोसे को पुरस्कृत करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, क्रिप्टो समुदाय की प्रगति से हमें भी लाभ होगा।' कॉइनडेल्टा एक्सचेंज एसीटी कॉइन मेंं कारोबार करने वाले शीर्ष 500 कारोबारियों को कुल 80,000 एसीटी कॉइन प्रदान करेगा।

क्रिप्टो कानून के कानूनी सलाहकार और आभासी मुद्रा बाजार पर नजर रखने वाले वकील मोहम्मद दानिश कहते हैं कि ऐसी प्रतियोगिताओं से कारोबार में बढ़ोतरी होती है। हालांकि इसमें किसी एक मुद्रा की भागीदारी आभासी मुद्रा बाजार में स्वस्थ व्यापार प्रतिस्पर्धा को विरूपित कर सकती है। वह कहते हैं, 'अनियमित क्रिप्टो बाजार में इस तरह की प्रतिस्पर्धाएं किसी एक आभासी मुद्रा को अधिक लाभ पहुंचाएंगी। साथ ही, इस तरह की प्रतिस्पर्धाएं कराने वाले एक्सचेंजों को इन कॉइन के फर्जी या स्कैम ना होने की भी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'

इसके इतर, आभासी मुद्रा में कारोबारी सुविधा देने वाले विभिन्न एक्सचेंज और दूसरी कंपनियां भारत में अपना कारोबार विस्तार करने के लिए तैयार बैठी हैं और नीतिगत स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के दो दिन बाद ही कॉइनडीसीएक्स एक्सचेंज ने इस क्षेत्र में कदम रखा। हालांकि नीतिगत बाधाओं के चलते वह अभी क्रिप्टो से क्रिप्टो कारोबार की सुविधा ही प्रदान कर रहा है। बिटफ्यू एक्सचेंज भी क्रिप्टो से क्रिप्टो लेनदेन उपलब्ध करा रहा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में आरबीआई निर्णय के खिलाफ याचिका दायर करने वाली कंपनी काली डिजिटल भी कॉइन रिकॉइल नाम से आभासी मुद्रा एक्सचेंज स्थापित कर रही है, जहां संभवत: अगस्त से परिचालन शुरू होगा। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में कार्यरत भारतीय क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज विभिन्न नई मुद्राओं को शामिल कर रहे हैं। कॉइनेक्स, कॉइनडेल्टा, जेबपे समेत अधिकांश एक्सचेंज रुपयों में लेनदेन के साथ ही क्रिप्टो से क्रिप्टो लेनदेन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 अप्रैल को कहा था कि आरबीआई द्वारा नियंत्रित इकाइयां ऐसे किसी व्यक्ति या कारोबारी इकाइयों को सेवा उपलब्ध नहीं कराएंगी जो आभासी मुद्रा से जुड़े हों। साथ ही अभी इस क्षेत्र में कारोबार कर रही इकाइयों को तीन माह की समयसीमा दी गई है। हालांकि भारतीय एक्सचेंजों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है और इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

राजदीप का कहना है कि आरबीआई के इस निर्णय से भारत में कई ब्लॉकचेन परियोजनाओं को झटका लगेगा। वह कहते हैं, 'इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देना जरूरी था क्योंकि इस तरह के निर्णय तकनीक के क्षेत्र में नवोन्मेष को रोक सकते हैं। हमारा मानना है कि आरबीआई अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे और प्रतिबंध के बजाय उद्योग से जुड़े लोगों की मदद से आवश्यक नियम बनाए।'

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