जीडीपी ने भरी तेज रफ्तार : जनवरी-मार्च 2018 की तिमाही में आर्थिक वृद्धि 7.7 फीसदी पर जा पहुंची

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली May 31, 2018 10:37 PM IST

जीडीपी की वृद्धि दर 7 तिमाहियों के सर्वाधिक स्तर पर

निवेश एवं व्यय बढ़ाने की सरकारी कोशिशों के चलते वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी एवं अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पिछली सात तिमाहियों के सर्वाधिक स्तर 7.7 फीसदी तक जा पहुंची। इसके बावजूद 2017-18 के समूचे वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर मोदी सरकार के कार्यकाल के चार वर्षों में सबसे कम 6.7 फीसदी ही रही।  बहरहाल जनवरी-मार्च 2018 की तिमाही में 7.7 फीसदी की वृद्धि दर से उत्साहित वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 7.5 फीसदी दर से बढ़ने का भरोसा जताया है। आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 2018-19 के लिए घोषित लक्ष्य का यह ऊपरी स्तर है।

मोदी सरकार के लिए समाप्त वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही राहत की खबर लेकर आई है। चौथी तिमाही के लिए दूसरा संशोधित अनुमान भी 6.6 फीसदी ही लगाया गया था लेकिन जीडीपी वृद्धि ने सभी अनुमानों को झुठलाते हुए 7.7 फीसदी का ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया। इस तिमाही में शुद्ध अप्रत्यक्ष करों में हुई 9.1 फीसदी की वृद्धि ने जीडीपी आंकड़े को आधार कीमतों पर हुए 6.5 फीसदी सकल मूल्य संवर्धन से आगे पहुंचा दिया।

जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था चीन से काफी आगे रही है। हालांकि चीन 6.8 फीसदी वृद्धि दर के साथ दुनिया की सर्वाधिक तेजी से बढऩे वाली बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल करने में सफल रहा है। वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल ने चौथी तिमाही के आंकड़ों पर खुशी जताते हुए कहा, 'जीडीपी वृद्धि हरेक तिमाही में लगातार बढ़ रही है। यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था सही राह पर है और भविष्य में इससे भी ऊंचे विकास दर की ओर अग्रसर है।' 

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार मौजूदा वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 7.5 फीसदी के अपने वृद्धि लक्ष्य में कोई कटौती नहीं करने जा रही है। माना जा रहा है कि जनवरी-मार्च तिमाही में हुई उच्च वृद्धि दर के लिए निवेश एवं सार्वजनिक व्यय में हुई तीव्र बढ़ोतरी का अहम योगदान रहा है। इसके साथ ही पिछले वर्ष की समान अवधि में वृद्धि दर के महज 6.1 फीसदी रहने से भी इस बार की तुलनात्मक दर ऊंची लग रही है। सकल निर्धारित पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) का प्रतिनिधि माने जाने वाली निवेश गतिविधि 14 फीसदी की दर से बढ़ी है जो पिछली कई तिमाहियों में सबसे अधिक है।

राजकोषीय घाटा लक्ष्य
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.53 प्रतिशत रहा है। यह मोटे तौर पर सरकार के संशोधित अनुमान के अनुरूप ही है। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राजस्व घाटा जीडीपी का 2.65 प्रतिशत रहा। आंकड़ों में बात करें तो राजकोषीय घाटा 5.91 लाख करोड़ रुपये (बजट अनुमान का 99.5 प्रतिशत) रहा।

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