बिजली क्षेत्र का संकट हो दूर

श्रेया जय | नई दिल्ली Jun 01, 2018 10:34 PM IST

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिजली क्षेत्र का संकट दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय को सभी पक्षों के साथ बैठक करने और एक महीने में संभावित हल निकालने को कहा है। न्यायालय ने इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईपीपीएआई) की याचिका पर यह आदेश दिया। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश पर दिवालिया कानून (आईबीसी) के तहत चल रही कार्यवाही के खिलाफ यह याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने साथ ही कहा कि अगर इरादतन चूक का मामला न हो तो वित्त मंत्रालय की बैठक होने तक आईबीसी के तहत किसी भी कार्रवाई से परहेज किया जाना चाहिए। न्यायालय के इस आदेश को बिज़नेस स्टैंडर्ड ने देखा है। 

न्यायालय ने कहा कि हजारों मेगावाट क्षमता के कई संयंत्र गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और फिलहाल एसएमए-1/2 की प्रक्रिया में हैं या फिर एनपीए बनने की ओर अग्रसर हैं। ईंधन की कमी, ईंधन आपूर्ति समझौते और बिजली खरीद समझौते के अभाव तथा कई अन्य कारणों से स्थिति पैदा हुई है। इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय मांग के आधार पर शुरू किया गया था। लेकिन अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण ये संयंत्र नकदी प्रवाह, क्रेडिट रेटिंग और ब्याज की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में बैंकों, वित्तीय संस्थानों, संयुक्त कर्जदाता फोरमों के स्थिति को समझे बिना आरबीआई के दिशानिर्देश लागू करने से इन संयंत्रों की स्थिति और बदतर होगी और उनके पटरी पर लौटने की कोई उम्मीद नहीं रहेगी। 

आरबीआई ने फरवरी में बैंकों को निर्देश दिए थे कि कर्ज के भुगतान में एक दिन की भी देरी करने वाली संपत्तियों को डिफॉल्ट की श्रेणी में डाला जाए। केंद्रीय बैंक ने इस बारे में जारी अधिसूचना में कहा था कि दबाव वाले खाते के खिलाफ समाधान प्रक्रिया 180 दिन में पूरी हो जानी चाहिए। आईपीपीएआई ने अपनी याचिका में रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड को पक्ष बनाया था। अपनी दलील में उसने कहा कि सरकार की एकतरफा कार्रवाई से बिजली क्षेत्र की कई जानी मानी कंपनियों पर बहुत असर पड़ा है। आरबीआई की अधिसूचना मनमानी, अव्यावहारिक, भेदभावपूर्व और संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 (1) (जी) का उल्लंघन है। 

विभिन्न कारणों से 80 हजार मेगावाट की चालू और निर्माणाधीन बिजली उत्पादन परियोजनाएं वित्तीय संकट से जूझ रही हैं और रिजर्व बैंक की अधिसूचना के बाद उनके राष्टï्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में जाने की संभावना बढ़ गई है। एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स के महानिदेशक ए के खुराना ने कहा, 'अगर डेवलपरों, बिजली, कोयला तथा वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत में इन मुद्दों के समाधान के लिए कोई कार्ययोजना बनती है तो रिजर्व बैंक अपने दिशानिर्देश पर पुनर्विचार कर सकता है।' इस बीच स्टेट बैंक की अगुआई में प्रमुख बैंक कुछ बिजली परिसंपत्तियों को उबारने के लिए आईबीसी से इतर योजना पर काम कर रहे हैं। 
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