छिड़ा किसान आंदोलन.. अब निकलेगा जेब का दम

बीएस संवाददाता | नई दिल्ली/मुंबई Jun 01, 2018 10:39 PM IST

फसल और उत्पादों के वाजिब दाम, कर्ज माफी और दूसरी मांगों को लेकर किसानों ने आज देशव्यापी गांव बंद आंदोलन शुरू कर दिया। उनका यह आंदोलन 10 दिन तक चलेगा। आंदोलनकारियों ने कई जगह सड़कों पर फल-सब्जी और दूध फैलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस कारण आंदोलन के पहले ही दिन कुछ राज्यों में फल-सब्जी, दूध और दूसरे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति रुकती दिखी, जिसका असर उनकी कीमतों पर भी नजर आया। कारोबारियों के मुताबिक अगर 10 दिन तक हालात ऐसे ही रहे तो फलों, सब्जियों, दूध और खाने-पीने के दूसरे सामान की कीमतों में तेज उछाल आ सकती है।

किसानों ने सरकार पर दबाव डालने और अपनी मांगें पूरी कराने के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्टï्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों तथा मंडियों में आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति ही रोक दी। पंजाब में तो किसानों ने हजारों लीटर दूध सड़कों पर बिखेर दिया और सब्जियां भी रास्तों में डाल दीं। इस कारण वहां की मंडियों में फल और सब्जियों की आवक करीब 80 फीसदी कम हो गई। पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी इन वस्तुओं की आवक 50 फीसदी घट गई। 

मध्य प्रदेश में भी आंदोलन का असर देखा गया और वहां कुछ मंडियों में सब्जियों की आवक एकदम कम हो गई। इंदौर मंडी में तो आपूर्ति घटने का असर भी फौरन नजर आया और शाम होते-होते कुछ सब्जियों के दाम चार गुना तक हो गए। सूत्रों के मुताबिक मंडी में आज सब्जियों के तीन ट्रक ही पहुंचे, जबकि रोजाना करीब 300 ट्रक वहां आते हैं। मध्य प्रदेश में प्रशासन ने खासी सतर्कता बरती है और कुछ हिस्सों में धारा 144 भी लगा दी है ताकि आंदोलनकारियों का जमावड़ा नहीं होने पाए। 

महाराष्ट्र में भी किसान आंदोलन के कारण मंडियों में बमुश्किल 20 फीसदी माल की आवक हो पाई। सरकारी वेबसाइट एगमार्कनेट से मिले आंकड़ों के मुताबिक आज पूरे राज्य में केवल 18,894 टन फल, सब्जी आदि पहुंचे, जबकि 31 मई को राज्य की मंडियों में 94,704 मीट्रिक टन कृषि उत्पाद आए थे। आपूर्ति कम होने से सब्जियां महंगी हो गईं। 

मुंबई थोक मंडी में बैंगन कल 1,400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, लेकिन आज उसका भाव 28.6 फीसदी चढ़कर 1,800 रुपये क्विंटल हो गया। पत्ता गोभी 18 फीसदी, गोभी 14 फीसदी, करेला 4 फीसदी और अदरक 4 फीसदी महंगे हो गए। दूध की कमी तो राजस्थान को भी झेलनी पड़ी। वहां श्रीगंगानगर, झुंझनू जैसे जिलों में किल्लत ज्यादा महसूस हुई क्योंकि 1,000 से अधिक दुग्ध आपूर्तिकर्ता आंदोलन के समर्थन में खड़े हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, संभल और पश्चिमी इलाकों में भी किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। बहरहाल दिल्ली में अभी आंदोलन का असर नहीं दिखा है। आजादपुर मंडी के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि पहले दिन मंडी पर असर नहीं हुआ, लेकिन आंदोलन ऐसे ही चला तो आवक घटने से अगले हफ्ते दाम बढ़ सकते हैं। 

यह आंदोलन राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले हो रहा है, जिसे 130 क्षेत्रीय और राष्ट्रीय किसान संगठनों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। महासंघ के संयोजक शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने कहा कि 22 राज्यों में एक साथ शुरू हुए गांव बंद आंदोलन के अंतिम दिन 10 जून को पूरे देश के किसान संगठन भारत बंद करेंगे। इसमें शहर के व्यापारियों और प्रतिष्ठानों से दोपहर 2 बजे तक अपने प्रतिष्ठïान बंद रखकर किसान आंदोलन में सहयोग प्रदाना करने का अनुरोध किया जाएगा। शर्मा ने कहा कि किसान देश भर के किसानों को कर्ज से पूरी तरह छुटकारा दिलाने, किसानों को उपज का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने, अपनी उपज मंडी लाकर बेचने में अक्षम बेहद छोटे किसानों के परिवार की आय सुनिश्चित किए जाने और दूध, फल-सब्जी, आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर का लागत से डेढ़ गुना लाभकारी समर्थन मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं। 
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