घटा केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Jun 01, 2018 11:07 PM IST

केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में भारी कमी आई है, लेकिन सकल स्थायी पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में 14 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है। इससे निवेश के स्रोतों को लेकर भ्रामक संकेत मिलते हैं। बहरहाल व्यापक तौर पर यह माना जा रहा था कि अर्थव्यवस्था में निवेश का संचालन सरकार कर रही है। 

गुरुवार को महालेखा नियंत्र द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर सरकार का पूंजीगत व्यय 58.37 प्रतिशत कम हुआ है। ज्यादा संभावना है कि साल के पहले हिस्से में अग्रिम व्यय की वजह से ऐसा हुआ हो, क्योंकि इस समय बजट पहले पेश किया जा रहा है। बहरहाल 2016-17 में भी ऐसा ही हुआ था। 

वित्त वर्ष 18 की चौथी तिमाही में सरकार का व्यय 16.8 प्रतिशत बढ़ा है जबकि तीसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत बढ़ा था। गुरुवार को जारी सकल घरेलू अनुपात (जीडीपी) के आंकड़े के मुताबिक यह सभी खपत पर व्यय था। इक्रा में प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नैयर का कहना है कि 10 राज्य सरकारों ने भी 2017-18 में पूंजीगत व्यय 7.1 प्रतिशत कम किया है। यह कहानी वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही से अलग है, जब केंद्र सरकार ने कैपेक्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी, जबकि जीएफसीएफ कम हुआ था। 

कौन कर रहा है निवेश का संचालन
ईवाई में मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि स्थायी संपत्तियों पर परिवारों का निवेश और सरकार का पहले का पूंजीगत व्यय निवेश का संचालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ते मकानों पर परिवारों के निवेश से निवेश को बल मिल रहा है। फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) की एक हाल की रिपोर्ट के मुताबिक कम लागत वाले मकानों के लिए वित्तपोषण करने वाली कंपनियों ने मांग बढ़ाई है और रियल एस्टेट के गिरते बाजार को बल दिया है। 

इन कंपनियों का लोन बुक मार्च 2013 के 10 अरब रुपये से बढ़कर दिसंबर 2017 में 270 अरब रुपये से ज्यादा हो गया है। इसकी वजह से इस अवधि के दौरान 2,30,000 मकान खरीदने में मदद मिली है। 

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल के शुरुआती हिस्से में सरकार का कैपेक्स जोरदार था, जिसका असर चौथी तिमाही पर पड़ा है। बहरहाल डेलॉयट इंडिया में मुख्य अर्थशास्त्री अनीस चक्रवर्ती ने कहा कि निवेश चक्र को गति देने में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीने में निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र ने 500 अरब रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। चक्रवर्ती ने कहा कि विनिर्माण व आईटी को छोड़कर सेवा क्षेत्र में कैपेक्स बढ़ा है। वहीं एमके ग्लोबल फाइनैंसियल सर्विसेज के अर्थशास्त्री और रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा कि आईआईपी निवेश बहाल होने के बेहतर संकेत दे रहा है। 
कीवर्ड जीएफसीएफ, जीडीपी, अदिति नैयर, अर्थशास्त्री,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक