भारत में हो सकता है बड़ा गैस भंडार

शाइन जैकब | नई दिल्ली Jun 05, 2018 09:54 PM IST

हाल ही मेंं जब पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि भारत में 300 साल के इस्तेमाल के लिए हाइड्रोकार्बन भंडार हो सकता है, तब वह तमाम लोगों के निशाने पर आ गए थे। बहरहाल अमेरिका के भूगर्भीय सर्वे के मुताबिक भारत में दूसरा सबसे बड़ा गैस हाइड्रेट का भंडार हो सकता है, जो अमेरिका के बाद दुनिया का सबसे बड़ा भंडार होगा। कृष्णा गोदावरी (केजी), कावेरी और केरल बेसिन में ही सिर्फ 100 से 130 लाख करोड़ घन फुट अनुमानित भंडार होने की संभावना है। पिछले महीने नैशनल गैस हाइड्रेट प्रोग्राम (एनजीएचपी) की बैठक में हाल के अनुमानों पर चर्चा हुई थी। सरकार ने महत्त्वाकांक्षी योजना के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के चेयरमैन शशि शंकर ने पिछले सप्ताह मीडिया से कहा था, 'हमने एनजीएचपी-3 के लिए योजना बनाई है। केजी के गहरे जल में प्रायोगिक परीक्षण की योजना है। हम नवी मुंबई के पनवेल इलाके में एक समर्पित गैस हाइड्रेट शोध केंद्र स्थापित कि या है।'
 
प्राकृतिक गैस हाइड्रेट पानी के बर्फ के रूप और गैस का मॉलिकुलर कैविटीज के रूप में मिश्रण होता है। बहरहाल दुनिया के किसी भी देश में अब तक गैस हाइड्रेट के वाणिज्यिक और आर्थिक उत्पादन की तकनीक विकसित नहीं की है।  ओएनजीसी के अधिकारियों, अमेरिका के भूगर्भीय सर्वे व जापान की ड्रिलिंग कंपनी का एक दल इस पर अध्ययन कर रहा है। अब तक तेल उद्योग विकास बोर्ड (ओआईडीबी) ने इस कार्यक्रम के लिए करीब 200 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी है। व्यवस्था के मुताबिक शोध ïएवं विकास (आरऐंडडी) गतिविधियोंं पर आने वाले खर्च का वहन ओआईडीबी, ओएनजीसी, गेल इंडिया, ऑयल इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन मिलकर करेंगे। 
 
अधिकारी ने कहा, 'इस समय डिप्रेशराइजिंग, हीटिंग विधि और निकाली गई गैस को हटाने के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड के इस्तेमाल के तरीके हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं। बहरहाल इसे आॢथक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए तकनीक की जरूरत है। हमने केजी बेसिन पर बड़ा दांव खेला है क्योंकि उस क्षेत्र के भंडार को आसानी से निकाला जा सकता है।'  अमेरिका और जापान के अलावा भारत ने इस सिलसिले में तकनीक विकसित करने के लिए कनाडा के साथ भी एक समझौता किया है। डेलॉयट टचे तोमात्सू इंडिया के पार्टनर देवाशीष मिश्र ने कहा, 'गैस बहुतायत मात्रा में मिलती है, ऐसे में इस पर बहुत ज्यादा शोध नहीं हो रहा है। अभी इसका दोहन वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।' 
 
2015 में श्लमबर्गर के अनुमान के बाद कहा गया था कि भारत में 300 और 2,100 सीटीएफ शेल गैस और तेल भंडार है। अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक कैंबे, केजी, कावेरी और दामोदर में मिलाकर 290 टीसीएफ का भंडार है।  भारत मेंं गैस हाइड्रेट कार्यक्रम 1997 में शुरू किया गया था और ओवरसीज ड्रिलिंग, फुग्रो, मैकक्लेलैंड, मैरीन जियोसाइंस, जियोटेक, लैमंट, डोहर्थी और अर्थ ऑब्जर्वेटरी के एक कंसोर्टियम की मदद से पहली बार 2006 में अध्ययन किया गया। 
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