महंगाई का डर, बढ़ी ब्याज दर

अनूप रॉय | मुंबई Jun 06, 2018 09:52 PM IST

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आने वाले दिनों में मुद्रास्फीति में तेजी की आशंका के बीच मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सभी 6 सदस्यों ने रीपो दर में वृद्घि के पक्ष में अपना मत दिया। रीपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दी गई। हालांकि बाजार दरों में वृद्घि को लेकर चकित नहीं है, लेकिन सभी सदस्यों द्वारा दरें बढ़ाने पर सहमति जताने को लेकर कुछ लोग हैरान जरूर हैं।

इससे पहले 28 जनवरी, 2014 को रीपो दर में इजाफा किया गया था। उस समय रीपो दर 8 फीसदी पर थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपना रुख तटस्थ बनाए रखा है लेकिन  बॉन्ड बाजार को आशंका है कि जल्द ही दरों में एक बार और इजाफा किया जा सकता है। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 8 आधार अंक बढ़कर 7.83 फीसदी पर पहुंच गया। मौद्रिक नीति समिति की बैठक में बढ़ती कीमतों को लेकर स्पष्टï तौर पर चिंता जताई गई।

आरबीआई ने पहली छमाही के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधन कर 4.8 से 4.9 फीसदी और दूसरी छमाही में 4.7 फीसदी कर दिया है। अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति मार्च के 4.3 फीसदी से बढ़कर 4.6 फीसदी हो गई थी। नीतिगत बयान में कहा गया, 'कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इससे मुद्रास्फीति के परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।' इसके साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों मेंं  हलचल और राज्य सरकारों द्वारा आवास भत्ते में संभावित वृद्घि का भी मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है।

आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने कहा, 'एमपीसी के निर्णय में थोक मुद्रास्फीति के अनुमान से ज्यादा बढऩे और 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बने रहने को लेकर चिंता जताई गई।' उन्होंने कहा कि हाल की तिमाहियों में आर्थिक गतिविधियों में सुधार हुआ हैै और निवेेश गतिविधि भी धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है। आमतौर पर केंद्रीय बैंक पहले अपने रुख में बदलाव लाता है और फिर नीतिगत दर में संशोधन करता है। लेकिन इस बार केंद्रीय बैंक ने अपने रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जबकि दरों में इजाफा कर दिया।

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि भारतीय केंद्रीय बैंक ने अपने इलाके के अन्य केंद्रीय बैंकों की तर्ज पर दरों में इजाफा किया है। इससे पहले इंडोनेशिया और फिलीपींस ने भी विदेशी निवेश की निकासी के कारण अपनी स्थानीय मुद्राओं को गिरावट से बचाने के लिए दरों में इजाफा किया था। डीबीएस बैंक में इंडिया अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, 'प्रतिक्रियात्मक नीतिगत बदलाव की तुलना में प्रारंभिक स्तर पर नीति को सख्त बनाना उचित कदम है।'

बीएनपी पारिबा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री सु सिआन लिम ने कहा कि आरबीआई इससे थोड़ा पहले दरें बढ़ा सकता था। लेकिन उसने धीरे-धीरे नीतिगत दरें सख्त बनाने का दृष्टिïकोण अपनाया है। राव और लिम ने अगस्त से पहले 25 आधार अंकों और इजाफा करने की संभावना जताई। 

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