कारोबारी विवाद प्राथमिकता में

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Jun 11, 2018 09:51 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच अहम कारोबारी विवादों का मैत्रीपूर्ण समाधान निकालना वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की दो दिवसीय अमेरिका यात्रा के एजेंडे में शामिल है। दोनों देशों के बीच कुछ अहम मसलोंं पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में विवाद चल रहा है।  सोमवार से शुरू प्रभु की अमेरिका यात्रा के दौरान कारोबार और उससे जुड़े मसलों पर अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस और अमेरिका के कारोबार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर से बातचीत होगी। इन दोनों अधिकारियों ने इसके पहले बाजार तक पहुंच और उच्च शुल्क को लेकर चीन और भारत को निशाना बनाया था। 
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम डब्ल्यूटीओ में चल रहे मामले के समाधान की राह निकालने के लिए द्विपक्षीय कवायद पर ध्यान केंद्रित करेंगे। बहरहाल बातचीत का आधिकारिक  एजेंडा किसी खास मसले पर केंद्रित नहीं है और इसमें शुल्क को लेकर विवाद और कड़े आव्रजन मानक सहित व्यापक विषय शामिल होंगे।'   विवाद के अलावा प्रभु की यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बार बार 'रेसीप्रोकल टैरिफ' की धमकी दे रहे हैं।  ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से भारत के दूसरे बड़े कारोबारी हिस्सेदार अमेरिका के साथ कारोबारी बातचीत पर बुरा असर पड़ा है। भारत से अमेरिका को होने वला निर्यात 2017-18 में बढ़कर 47.87 अरब डॉलर हो गया है, जो एक साल पहले 42.21 अरब डॉलर था। कारोबारी घाटा बढऩा भी अमेरिका की चिंता का विषय है। 
 
अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह निर्यात संवर्धन योजनाओं का दुरुपयोग कर रहा है और डब्ल्यूटीओ नियमों की अवहेलना कर रहा है। अमेरिका ने कहा है कि 6 प्रमुख प्रमोशन योजनाओं से भारत को अनुमानित रूप से 7 अरब डॉलर का फायदा हुआ है। इसमें मर्केंडाइज एक्सपोट्र्स फ्रॉम इंडिया स्कीम और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स स्कीम शामिल है, जिसमें स्क्राइप्स के माध्यम से हजारों इकाइयों को मदद मिलती है।वहीं भारत का तर्क है कि अमेरिका के कानून द एग्रीमेंट आन सब्सिडीज ऐंड काउंटरवेलिंग मीजर्स (एएससीएम) में इन सब्सिडी को खत्म करने के लिए 8 साल का वक्त मिला हुआ है। इसके अलावा सरकार ने सभी देशों खासकर भारत और चीन के खिलाफ रेसीप्रोकल टैक्स लगाने की धमकी को लेकर भी तैयारी की है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका के निर्यात पर उच्च कर लगा हुआ है, जबकि आयात पर कम शुल्क है। 
 
अमेरिका ने स्टील और एल्युमीनियम आयात पर क्रमश: 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत कर लगाया है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका को होने वाले स्टील व एल्युमीनियम के निर्यात की हिस्सेदारी महज 2 प्रतिशत है, लेकिन उसने अमेरिका के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में मामला दर्ज कराया है।  दिल्ली के एक कारोबार से जुड़े विशेषज्ञ ने कहा, 'अमेरिका में भारत हीरे के आभूषण, दवाओं और समुद्री उत्पादों का भारी निर्यात करता है। ऐसे में सरकार इस विवाद को सुलझाने की पूरी कवायद करेगा। इसका मतलब यह है कि हार्ली डेविडसन मोटरसाइकिल जैसे कुछ सामानों पर शुल्क कम किया जा सकता है, जिसकी मांग ट्रंप प्रशासन कर रहा है।' बहरहाल पिछले सप्ताह प्रभु ने अमेरिका को कोई शुल्क छूट देने से इनकार करते हुए साफ किया था कि आयात शुल्क का मौजूदा स्तर डब्ल्यूटीओ द्वारा तय सीमा के भीतर है। 
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